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प्रतिवादी को प्रिंटिंग मशीन की कीमत वापस देने का आदेश
Updated Tue, 03 Apr 2018 10:56 PM IST
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चंपावत। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने सेवा में कमी के मामले की सुनवाई करते हुए प्रिंटिंग मशीन की सप्लाई करने वाली कंपनी को परिवादी को प्रिंटिंग मशीन की कीमत वापस देने का आदेश दिया है। इसके अलावा परिवादी को मानसिक और आर्थिक कष्ट के लिए एक हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने को भी कहा।
मंदाकिनी प्रिंटर्स टनकपुर की प्रोपराइटर निशा ने दिसंबर 2014 में कपिल सहगल विशेष कलर सेल्यूशन सेक्टर तीन एफ वैशाली जिला गाजियाबाद उत्तर प्रदेश से पीएमईजीपी योजना के तहत प्रिंटिंग मशीनें खरीदी थी, जिनका मूल्य दो लाख 76 हजार 190 रुपये था। एक सप्ताह बाद ही प्रिंटिंग मशीनें खराब हो गई। इस पर उन्होंने संबधित विपक्षी को मशीन वापस लेने को कहा, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने मामले को उपभोक्ता फोरम में डाल दिया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष जिला जज प्रेम सिंह खिमाल, सदस्य गिरीश चंद्र राय और लक्ष्मी पांडेय ने मामले की सुनवाई करते हुए विपक्षी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए प्रिंटिंग मशीनें वापस लेने और परिवादिनी को दो लाख 76 हजार 190 रुपये, मानसिक, आर्थिक कष्ट, वाद व्यय के रूप में एक हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति देने का फैसला सुनाया।
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यदि विपक्षी की ओर से धनराशि की अदायगी एक माह के भीतर नहीं की जाती है तो परिवादिनी को परिवाद दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज भी मिलेगा। इस मामले में अधिवक्ता विनोद प्रकाश, एससी जोशी ने पैरवी की।
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मंदाकिनी प्रिंटर्स टनकपुर की प्रोपराइटर निशा ने दिसंबर 2014 में कपिल सहगल विशेष कलर सेल्यूशन सेक्टर तीन एफ वैशाली जिला गाजियाबाद उत्तर प्रदेश से पीएमईजीपी योजना के तहत प्रिंटिंग मशीनें खरीदी थी, जिनका मूल्य दो लाख 76 हजार 190 रुपये था। एक सप्ताह बाद ही प्रिंटिंग मशीनें खराब हो गई। इस पर उन्होंने संबधित विपक्षी को मशीन वापस लेने को कहा, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया।
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उन्होंने मामले को उपभोक्ता फोरम में डाल दिया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष जिला जज प्रेम सिंह खिमाल, सदस्य गिरीश चंद्र राय और लक्ष्मी पांडेय ने मामले की सुनवाई करते हुए विपक्षी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए प्रिंटिंग मशीनें वापस लेने और परिवादिनी को दो लाख 76 हजार 190 रुपये, मानसिक, आर्थिक कष्ट, वाद व्यय के रूप में एक हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति देने का फैसला सुनाया।
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यदि विपक्षी की ओर से धनराशि की अदायगी एक माह के भीतर नहीं की जाती है तो परिवादिनी को परिवाद दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज भी मिलेगा। इस मामले में अधिवक्ता विनोद प्रकाश, एससी जोशी ने पैरवी की।