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योजनाओं का लाभ लेने वाले कम और लाभ मिल भी नहीं रहा
Updated Sun, 17 Dec 2017 09:17 PM IST
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चंपावत। देश का संविधान हर एक को समान अधिकार देने के साथ अल्पसंख्यक समाज को कुछ खास संरक्षण भी देता है। संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद जिले में अल्पसंख्यकों की कुछ मुश्किलें भी हैं।
अमर उजाला से बातचीत में इस समुदाय के लोग कहते हैं कि उनके साथ भेदभाव तो नहीं होता, लेकिन कई जरूरी सुविधाओं की कमी जरूर खलती है। यहां तक कि उनके पास इबादत के लिए जगह तक नहीं है।
चंपावत जिले की करीब 2.65 लाख की आबादी में अल्पसंख्यकों की तादात 9951 (करीब 3.75 प्रतिशत) है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी एनबी बचखेती का कहना है कि जिले में 8693 मुस्लिम, 870 सिख, 336 ईसाई, 28 जैन और 24 बौद्ध हैं।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी बीडी पंत का कहना है कि उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण वक्फ निगम के जरिये प्रदेश में कई सरकारी योजनाएं चल रही है, लेकिन जिले में इन योजनाओं से लाभ लेने वालों की संख्या भी बेहद कम है।
अल्पसंख्यक स्वत: रोजगार योजना के लाभार्थियों की संख्या भी लगातार गिर रही है। वित्त वर्ष 2016-17 में महज 4 लोगों को लाभ मिला, जबकि 2012 में लाभार्थियों की संख्या 10 थी। टर्म लोन योजना के तहत भी मात्र 2 लोगों को लाभ मिला।
अल्पसंख्यक शिक्षा ऋण योजना के अंतर्गत 2014-15 के बाद से एक भी छात्र-छात्रा ने कर्ज नहीं लिया। इसके अलावा स्वैच्छिक संस्थाओं के जरिये भी कंप्यूटर, सिलाई, खिलौने बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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अमर उजाला से बातचीत में इस समुदाय के लोग कहते हैं कि उनके साथ भेदभाव तो नहीं होता, लेकिन कई जरूरी सुविधाओं की कमी जरूर खलती है। यहां तक कि उनके पास इबादत के लिए जगह तक नहीं है।
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चंपावत जिले की करीब 2.65 लाख की आबादी में अल्पसंख्यकों की तादात 9951 (करीब 3.75 प्रतिशत) है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी एनबी बचखेती का कहना है कि जिले में 8693 मुस्लिम, 870 सिख, 336 ईसाई, 28 जैन और 24 बौद्ध हैं।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी बीडी पंत का कहना है कि उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण वक्फ निगम के जरिये प्रदेश में कई सरकारी योजनाएं चल रही है, लेकिन जिले में इन योजनाओं से लाभ लेने वालों की संख्या भी बेहद कम है।
अल्पसंख्यक स्वत: रोजगार योजना के लाभार्थियों की संख्या भी लगातार गिर रही है। वित्त वर्ष 2016-17 में महज 4 लोगों को लाभ मिला, जबकि 2012 में लाभार्थियों की संख्या 10 थी। टर्म लोन योजना के तहत भी मात्र 2 लोगों को लाभ मिला।
अल्पसंख्यक शिक्षा ऋण योजना के अंतर्गत 2014-15 के बाद से एक भी छात्र-छात्रा ने कर्ज नहीं लिया। इसके अलावा स्वैच्छिक संस्थाओं के जरिये भी कंप्यूटर, सिलाई, खिलौने बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।