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साक्षरता का उजाला बिखेरने वालों की दीवाली फीकी
Updated Sun, 15 Oct 2017 10:20 PM IST
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चंपावत। साक्षरता मिशन की परियोजना की समयावधि 30 सितंबर को पूरी हो गई। लेकिन निरक्षरों को साक्षर करने वाले इन 578 प्रेरकों को 17 माह का मानदेय तक नहीं मिल सका है। ऐसे में इस बार इन प्रेरकों की दिवाली फीकी रहेगी।
प्रदेश में चंपावत, बागेश्वर, ऊधमसिंह नगर, उत्तरकाशी, टिहरी और हरिद्वार के 2726 ग्राम पंचायतों में साक्षर भारत मिशन का कार्यक्रम साल 2010 से चल रहा है। चंपावत जिले की 289 ग्राम पंचायतों में स्थापित लोक साक्षरता केंद्र के जरिए 15 वर्ष और उससे अधिक के 38617 निरक्षरों को साक्षर (लिखने, पढने की समझ लायक) बनाने का लक्ष्य था। यहां यह आंकड़ा 100 प्रतिशत से भी अधिक सफल रहा। 42519 निरक्षरों को इस अवधि में साक्षर किया गया। लोक साक्षरता के जिला समन्वयक महेश चंद्र जोशी ने बताया कि इसके तहत होने वाली इस परीक्षा में निरक्षरों को अक्षर और चित्र के जरिए पढ़ना, लिखना व बोलना सिखाया गया।
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साक्षरता मिशन कामयाब तो जरूर रहा, लेकिन जमीनी स्तर (ग्राम पंचायत स्तर) पर योजना को संचालित करने वाले प्रेरकों को बीते 17 महीने से मानदेय नहीं मिला है। प्रेरक संगठन के संजय चौड़ाकोटी का कहना है कि महज दो हजार रुपये मानदेय है, लेकिन वह भी नियमित रूप से नहीं मिल रहा है। मानदेय के बगैर प्रेरकों की परेशानी बढ़ रही है। यहां तक कि पिछली सरकार द्वारा एक हजार रुपये मासिक बढ़ाया मानदेय भी चंपावत विकासखंड के प्रेरकों को नहीं मिल सका है।
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साक्षरता सामग्री को भी नहीं मिला धन
केवल मानदेय ही नहीं, साक्षरता के लिए जरूरी सामग्री के लिए भी धन नहीं मिल रहा है। अप्रैल 2015 के बाद से साक्षरता के लिए एक भी रुपया नहीं मिला है। लोक साक्षरता केंद्र 28 महीने से बगैर साक्षरता सामग्री के संचालित हो गया। प्रोग्राम कोस्टिंग से शिक्षण सामग्री समाचार पत्र, पत्र-पत्रिकाएं, संदर्भ व्यक्ति, प्रकाश व्यय, कार्यालय व्यय आदि खर्चे किए जाते हैं। बताया गया कि प्रेरकों ने इन कार्यों के लिए भी उधारी में व्यवस्था की।
कोट
जिले के प्रेरकों के मानदेय के लिए लगातार पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि अगले महीने तक मानदेय की रकम स्वीकृत हो जाएगी। वहीं प्रोग्राम कोस्टिंग की रकम की भी मांग की गई है। -महेश चंद्र जोशी, जिला समन्वय, भारत साक्षरता कार्यक्रम चंपावत।