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Champawat News: 1971 यु़द्ध के प्रतिभागी जांबाज हयात सिंह सम्मानित
Mon, 10 Nov 2025 10:49 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 10 Nov 2025 10:49 PM IST
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1971 युद्ध के जांबाज कैप्टन हयात सिंह को सम्मानित करते महाप्रबंधक ऋषि रंजन आर्या। स्रोत : एनएच
बनबसा (चंपावत)। एनएचपीसी के बनबसा स्थित टनकपुर पावर स्टेशन परिसर में सतर्कता विभाग की ओर से आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में क्षेत्र के पूर्व सैनिक को सम्मानित किया गया। वर्ष 1971 युद्ध के जांबाज सैनिक हयात सिंह को महाप्रबंधक ऋषि रंजन आर्य ने एनएचपीसी की ओर से शाॅल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
टनकपुर के रहने वाले कैप्टन हयात सिंह ठकुराठी ने वर्ष 1971 से भारतीय सेना में अपनी सेवाएं शुरू की। सेना का प्रशिक्षण पूरा करने के कुछ समय बाद ही उन्हें वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपना रण कौशल दिखाने का मौका मिला। उन्होंने 1971 के युद्ध में कश्मीर के उरी सेक्टर में 41 बटालियन के साथ मोर्चे पर हथियार पहुंचाने की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया था।
सेना में रहते हुए पूर्वी कमान में तवांग (चीन सीमा अरुणाचल प्रदेश), उत्तरी कमान में लेह-लद्दाख और कारगिल में अपनी वीरता और जांबाजी का परिचय दिया। वह वर्ष 2000 में सूबेदार मेजर बने और ऑनरेरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनका एक पुत्र भी भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत है।
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टनकपुर के रहने वाले कैप्टन हयात सिंह ठकुराठी ने वर्ष 1971 से भारतीय सेना में अपनी सेवाएं शुरू की। सेना का प्रशिक्षण पूरा करने के कुछ समय बाद ही उन्हें वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपना रण कौशल दिखाने का मौका मिला। उन्होंने 1971 के युद्ध में कश्मीर के उरी सेक्टर में 41 बटालियन के साथ मोर्चे पर हथियार पहुंचाने की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया था।
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सेना में रहते हुए पूर्वी कमान में तवांग (चीन सीमा अरुणाचल प्रदेश), उत्तरी कमान में लेह-लद्दाख और कारगिल में अपनी वीरता और जांबाजी का परिचय दिया। वह वर्ष 2000 में सूबेदार मेजर बने और ऑनरेरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनका एक पुत्र भी भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत है।
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