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आरक्षण के एलान के बाद तेज हुई शहर की सियासी तपिश
Updated Sun, 29 Apr 2018 10:28 PM IST
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चंपावत। जिले की चारों नगर निकायों के अध्यक्ष पद के आरक्षण की तस्वीर से पर्दा उठने के बाद अब सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सबसे ज्यादा हलचल जिला मुख्यालय की नगर पालिका के अध्यक्ष पद को लेकर है। अब यहां मौजूदा अध्यक्ष से लेकर आधा दर्जन से अधिक दावेदार मुखर हो गए हैं। वहीं अपनी राह निष्कंटक समझने वाले कई प्रत्याशियों को इस सीट के अनारक्षित होने से तगड़ा झटका लगा है।
6333 मतदाता वाली चंपावत नगर पालिका में दलों का टिकट पाने की होड़ शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा चुनौती भाजपा में है। पिछले चुनाव में मुख्य मुकाबला चार प्रत्याशियों मौजूदा पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र तिवारी, दूसरे नंबर पर रहे निर्दलीय प्रकाश पांडेय, कांग्रेस के सज्जन वर्मा और रवींद्र सिंह तड़ागी के बीच था। सज्जन वर्मा और रवींद्र सिंह तड़ागी 2017 के विधानसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो चुुके हैं। भाजपा से मौजूदा पालिकाध्यक्ष का दावा सबसे तगड़ा है। लेकिन पार्टी के भीतर नए होने के बावजूद सज्जन वर्मा की चुनौती भी बेहद कांटे की है। वह मजबूत जनाधार वाले नेता हैं और 2003 में उनकी पत्नी पूनम वर्मा चंपावत नगर पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं।
विधायक कैलाश गहतोड़ी के करीबी होने का लाभ भी सज्जन वर्मा को मिल सकता है। उनके अलावा भाजपा चंपावत मंडल के अध्यक्ष कैलाश सिंह अधिकारी और नीरज वर्मा भी दावेदारी ठोक रहे हैं। अब तमाम दावेदार सीट के अनारक्षित होने के बाद के हालात के मद्देनजर अपनी रणनीति तय करने में जुटे हैं। वहीं कुछ नेताओं द्वारा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साध अपने अनुकूल हालात बनाने की जुगत भी शुरू कर दी गई है।
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फिलहाल कांग्रेस में खामोश हैं दावेदार
2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव की हार के बाद से कांग्रेस की सियासी जमीन ढलान पर है। इसका असर नगर निकाय को लेकर चल रही सियासी हलचल पर भी नजर आ रहा है। कांग्रेस की ओर से चंपावत नगर पालिका अध्यक्ष के पद को लेकर अभी खास जोश नहीं दिखा रहा है। फिलहाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वर्मा पार्टी की ओर से सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
पस्त हुए पुरुष दावेदारों के हौसले
बनबसा (चंपावत)। बनबसा नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट महिला आरक्षित होने से इस पद के लिए अब तक दावेदारी कर रहे पुरुष दावेदारों के हौसले पस्त हो गए हैं। सीट महिला आरक्षित होने से महिलाओं ने अपनी दावेदारी शुरू कर दी है। कई पुरूष दावेदारों ने अपनी पत्नियों को मैदान में उतारने का मन बना लिया है। गौरतलब है कि 8 फरवरी 2014 को बनबसा गनर पंचायत गठन की अधिसूचना जारी हुई थी। तभी से क्षेत्र के कई नेता नगर पंचायत अध्यक्ष बनने का सपना संजोए हुए थे। दशहरे, दीपावली और नववर्ष में क्षेत्र में लगाए गए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग में कई के नाम सामने आए हैं। लेकिन अध्यक्ष पद की सीट महिला आरक्षित होने से इस सीट के लिए दावेदारी करने वालों हौसले पस्त हो गए हैं। सीट महिला आरक्षित होने के बाद इस पद के लिए पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय अग्रवाल की पत्नी रेनू अग्रवाल, भाजपा से भाजपा की पूर्व महिला जिलाध्यक्ष पुष्पा पांडेय, रानी कापड़ी, विमला सजवान, कांग्रेस से सुधा बिष्ट और निर्दलीय में माधवी जोशी आदि के नाम सामने आने लगे हैं। अभी कई और महिलाओं के नाम सामने आने की संभावनाऐं जताई जा रही हैं।
6333 मतदाता वाली चंपावत नगर पालिका में दलों का टिकट पाने की होड़ शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा चुनौती भाजपा में है। पिछले चुनाव में मुख्य मुकाबला चार प्रत्याशियों मौजूदा पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र तिवारी, दूसरे नंबर पर रहे निर्दलीय प्रकाश पांडेय, कांग्रेस के सज्जन वर्मा और रवींद्र सिंह तड़ागी के बीच था। सज्जन वर्मा और रवींद्र सिंह तड़ागी 2017 के विधानसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो चुुके हैं। भाजपा से मौजूदा पालिकाध्यक्ष का दावा सबसे तगड़ा है। लेकिन पार्टी के भीतर नए होने के बावजूद सज्जन वर्मा की चुनौती भी बेहद कांटे की है। वह मजबूत जनाधार वाले नेता हैं और 2003 में उनकी पत्नी पूनम वर्मा चंपावत नगर पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं।
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विधायक कैलाश गहतोड़ी के करीबी होने का लाभ भी सज्जन वर्मा को मिल सकता है। उनके अलावा भाजपा चंपावत मंडल के अध्यक्ष कैलाश सिंह अधिकारी और नीरज वर्मा भी दावेदारी ठोक रहे हैं। अब तमाम दावेदार सीट के अनारक्षित होने के बाद के हालात के मद्देनजर अपनी रणनीति तय करने में जुटे हैं। वहीं कुछ नेताओं द्वारा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साध अपने अनुकूल हालात बनाने की जुगत भी शुरू कर दी गई है।
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फिलहाल कांग्रेस में खामोश हैं दावेदार
2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव की हार के बाद से कांग्रेस की सियासी जमीन ढलान पर है। इसका असर नगर निकाय को लेकर चल रही सियासी हलचल पर भी नजर आ रहा है। कांग्रेस की ओर से चंपावत नगर पालिका अध्यक्ष के पद को लेकर अभी खास जोश नहीं दिखा रहा है। फिलहाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वर्मा पार्टी की ओर से सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
पस्त हुए पुरुष दावेदारों के हौसले
बनबसा (चंपावत)। बनबसा नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट महिला आरक्षित होने से इस पद के लिए अब तक दावेदारी कर रहे पुरुष दावेदारों के हौसले पस्त हो गए हैं। सीट महिला आरक्षित होने से महिलाओं ने अपनी दावेदारी शुरू कर दी है। कई पुरूष दावेदारों ने अपनी पत्नियों को मैदान में उतारने का मन बना लिया है। गौरतलब है कि 8 फरवरी 2014 को बनबसा गनर पंचायत गठन की अधिसूचना जारी हुई थी। तभी से क्षेत्र के कई नेता नगर पंचायत अध्यक्ष बनने का सपना संजोए हुए थे। दशहरे, दीपावली और नववर्ष में क्षेत्र में लगाए गए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग में कई के नाम सामने आए हैं। लेकिन अध्यक्ष पद की सीट महिला आरक्षित होने से इस सीट के लिए दावेदारी करने वालों हौसले पस्त हो गए हैं। सीट महिला आरक्षित होने के बाद इस पद के लिए पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय अग्रवाल की पत्नी रेनू अग्रवाल, भाजपा से भाजपा की पूर्व महिला जिलाध्यक्ष पुष्पा पांडेय, रानी कापड़ी, विमला सजवान, कांग्रेस से सुधा बिष्ट और निर्दलीय में माधवी जोशी आदि के नाम सामने आने लगे हैं। अभी कई और महिलाओं के नाम सामने आने की संभावनाऐं जताई जा रही हैं।