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लड़खड़ा की फिर उठा जाता है आम आदमी...
Updated Sun, 30 Jul 2017 11:03 PM IST
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चंपावत।
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना मंच के तत्वावधान में रविवार को काव्य गोष्ठी हुई। डा.अजय कुमार रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता रिटायर्ड प्रधानाचार्य डा.बीसी जोशी ने आम आदमी के संघर्ष को यूं उकेरा-जितना कुचला जाय, लड़खड़ा कर फिर उठा जाता है आम आदमी।
जन कवि डा.प्रकाश चंद्र जोशी शूल ने वन बचाने का आह्वान किया-वृक्ष लगाएं हम अधिकाधिक, कांटे न उन्हें हम अकारण, जीवनदाता है ये हमारे, रोगों का ये करते निवारण। पुष्कर सिंह बोहरा ने कहा-वन बिना अधूरा मानव जीवन, ध्यान हमेशा रखना, हरेभरे जंगलों को तुम कभी नष्ट मत करना। हिमांशु जोशी ने-किसी की कविताएं, किसी की गजलें सुनने और आप सभी के दीदार का बड़ी बेसब्री से रहता है इंतजार। अंजू पांडेय ने ये कविता पेश की-लिखता-मिटाता अनगिनत चाहतों को, प्रीत गैरों से यूं ही निभाता रहा। डा.अजय कुमार रस्तोगी, राम प्रसाद आर्य, डा.सतीश पांडेय, राजीव श्रीवास्तव आदि ने भी उम्दा कविताएं सुनाईं। इस मौके पर संजय बोहरा, पीयूष जोशी आदि थ्रे।
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना मंच के तत्वावधान में रविवार को काव्य गोष्ठी हुई। डा.अजय कुमार रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता रिटायर्ड प्रधानाचार्य डा.बीसी जोशी ने आम आदमी के संघर्ष को यूं उकेरा-जितना कुचला जाय, लड़खड़ा कर फिर उठा जाता है आम आदमी।
जन कवि डा.प्रकाश चंद्र जोशी शूल ने वन बचाने का आह्वान किया-वृक्ष लगाएं हम अधिकाधिक, कांटे न उन्हें हम अकारण, जीवनदाता है ये हमारे, रोगों का ये करते निवारण। पुष्कर सिंह बोहरा ने कहा-वन बिना अधूरा मानव जीवन, ध्यान हमेशा रखना, हरेभरे जंगलों को तुम कभी नष्ट मत करना। हिमांशु जोशी ने-किसी की कविताएं, किसी की गजलें सुनने और आप सभी के दीदार का बड़ी बेसब्री से रहता है इंतजार। अंजू पांडेय ने ये कविता पेश की-लिखता-मिटाता अनगिनत चाहतों को, प्रीत गैरों से यूं ही निभाता रहा। डा.अजय कुमार रस्तोगी, राम प्रसाद आर्य, डा.सतीश पांडेय, राजीव श्रीवास्तव आदि ने भी उम्दा कविताएं सुनाईं। इस मौके पर संजय बोहरा, पीयूष जोशी आदि थ्रे।
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