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भिंगराड़ा अस्पताल में वार्डब्वाय बना डॉक्टर
Updated Tue, 11 Sep 2018 10:29 PM IST
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चंपावत। छह किलोमीटर पैदल चलकर बालातड़ी से मीना, जय राम और हरीश बुखार और अन्य दिक्कतों के इलाज के लिए भिंगराड़ा के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) पहुंचे। मगर यहां भी उन्हें मायूसी हाथ लगी। इस अस्पताल में न तो डॉक्टर मिले और ना ही फार्मेसिस्ट मिले। इस अस्पताल में एक अदद वार्ड ब्वाय मरीजों का इलाज कर रहा है और इन्हें दवा भी दे रहे हैं।
करीब दो वर्ष पहले नेपाल सीमा से लगे तामली के साथ भिंगराड़ा में एपीएचसी खोला गया था। यह अस्पताल एएनएम केंद्र के एक कमरे में चल रहा है। यहां तैनात डॉक्टर 3 सितंबर से प्रशिक्षण के लिए नैनीताल गए है। फार्मेसिस्ट का पद पहले से ही खाली है। इस वजह से यहां वार्ड ब्वाय ही क्षेत्र के लोगों का इलाज कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि खानापूरी के लिए अस्पताल खोलने से सुविधा मिलने के बजाय लोगों की दुश्वारी बढ़ रही है। लोगों ने नियमित रूप से डॉक्टर की व्यवस्था और डॉक्टर के प्रशिक्षण या अवकाश में जाने पर किसी अन्य अस्पताल से डॉक्टर की वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।
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करीब दो वर्ष पहले नेपाल सीमा से लगे तामली के साथ भिंगराड़ा में एपीएचसी खोला गया था। यह अस्पताल एएनएम केंद्र के एक कमरे में चल रहा है। यहां तैनात डॉक्टर 3 सितंबर से प्रशिक्षण के लिए नैनीताल गए है। फार्मेसिस्ट का पद पहले से ही खाली है। इस वजह से यहां वार्ड ब्वाय ही क्षेत्र के लोगों का इलाज कर रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि खानापूरी के लिए अस्पताल खोलने से सुविधा मिलने के बजाय लोगों की दुश्वारी बढ़ रही है। लोगों ने नियमित रूप से डॉक्टर की व्यवस्था और डॉक्टर के प्रशिक्षण या अवकाश में जाने पर किसी अन्य अस्पताल से डॉक्टर की वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।
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