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16 किमी. दूर से सामान ढोने को मजबूर सिलाड़ के ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Sun, 13 Nov 2016 11:01 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सिलाड़ ग्राम पंचायत के लोगों ने क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया है। डीएम को दिए ज्ञापन में कहा कि ग्राम पंचायत में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, कई बार आवाज उठाने के बावजूद कोई समाधान नहीं हो सका है।
सिलाड़ की ग्राम प्रधान पूजा का कहना है कि पंचायत के राजस्व तोक उदाली में अब तक बिजली नहीं पहुंचाई जा सकी है। बिजली न होने से जंगल के नजदीक बसे इस गांव के 75 परिवारों की जिंदगी अंधकारमय हो रही है। स्कूली बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है। क्षेत्र पंचायत की बैठक सहित कई मंचों पर आवाज उठाने के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला है।
ग्रामीणों ने राईसिंह खेड़ा-गंगसीर-खिरद्वारी सड़क के निर्माण की भी मांग की है। प्रधान ने कहा कि राईसिंह खेड़ा से करीब 16 किलोमीटर दूर आदिम जनजाति वनरावत बाहुल्य खिरद्वारी तक सड़क निर्माण बेहद जरूरी है। लोग खेती की उपज और दूसरी जरूरी सामान को कंधे से ढोने अथवा महंगे दाम पर घोड़े-खच्चरों से ढुलान को मजबूर हैं। इन मांगों पर ठोस कार्यवाही नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
सिलाड़ की ग्राम प्रधान पूजा का कहना है कि पंचायत के राजस्व तोक उदाली में अब तक बिजली नहीं पहुंचाई जा सकी है। बिजली न होने से जंगल के नजदीक बसे इस गांव के 75 परिवारों की जिंदगी अंधकारमय हो रही है। स्कूली बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है। क्षेत्र पंचायत की बैठक सहित कई मंचों पर आवाज उठाने के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला है।
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ग्रामीणों ने राईसिंह खेड़ा-गंगसीर-खिरद्वारी सड़क के निर्माण की भी मांग की है। प्रधान ने कहा कि राईसिंह खेड़ा से करीब 16 किलोमीटर दूर आदिम जनजाति वनरावत बाहुल्य खिरद्वारी तक सड़क निर्माण बेहद जरूरी है। लोग खेती की उपज और दूसरी जरूरी सामान को कंधे से ढोने अथवा महंगे दाम पर घोड़े-खच्चरों से ढुलान को मजबूर हैं। इन मांगों पर ठोस कार्यवाही नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
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