{"_id":"5d1f8c198ebc3e3c763fe906","slug":"15623485445-tanakpur-news118","type":"story","status":"publish","title_hn":"हनुमानचट्टी के करीब डेढ़ किमी. हिस्सा बेहद संवेदनशील घोषित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हनुमानचट्टी के करीब डेढ़ किमी. हिस्सा बेहद संवेदनशील घोषित
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टनकपुर (चंपावत)। बरसात के सीजन में मां पूर्णागिरि धाम की यात्रा सुरक्षित नहीं है। हनुमानचट्टी के करीब डेढ़ किमी. हिस्से को प्रशासन ने बेहद संवेदनशील घोषित किया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद मानसून के उत्तराखंड पहुंचने के बाद लोनिवि ने चेतावनी बोर्ड लगा दिए हैं। किरोड़ा और बाटनागाड़ के अलावा उसके आसपास बहने वाले नदी-नालों पर चेतावनी बोर्ड लगा दिए गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर किरोड़ा और बाटनागाड़ में वाटर बैरियर बोर्ड लगा दिए गए हैं।
एसडीएम दयानंद सरस्वती ने बताया कि मानसून शुरू होने और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए मां पूर्णागिरि धाम केे हनुमान चट्टी क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित किया गया है। लोनिवि को मलबा गिरने से मार्ग अवरुद्ध होते ही मलवा हटाकर मार्ग को सुचारू करने का ठेका आवंटित किया जा चुका है। ठेकेदार 24 घंटे जेसीबी और पोकलैंड मशीनें लगाकर मार्ग को सुचारु बनाए रखेगा। इसके लिए ठेका आवंटित किया गया है। इसके अलावा बारिश शुरू होते ही किरोड़ा और उसके आस-पास के नालों और बाटनागाड़ में सड़क के दोनों ओर वाटर बैरियर लगाए जाएंगे। बता दें कि बरसात के मौसम में शारदा चुंगी कॉलोनी क्षेत्र के अलावा ककरालीगेट से लेकर मां पूर्णागिरि धाम के भैरव मंदिर तक करीब 18 किमी. क्षेत्र आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है।
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एसडीएम दयानंद सरस्वती ने बताया कि मानसून शुरू होने और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए मां पूर्णागिरि धाम केे हनुमान चट्टी क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित किया गया है। लोनिवि को मलबा गिरने से मार्ग अवरुद्ध होते ही मलवा हटाकर मार्ग को सुचारू करने का ठेका आवंटित किया जा चुका है। ठेकेदार 24 घंटे जेसीबी और पोकलैंड मशीनें लगाकर मार्ग को सुचारु बनाए रखेगा। इसके लिए ठेका आवंटित किया गया है। इसके अलावा बारिश शुरू होते ही किरोड़ा और उसके आस-पास के नालों और बाटनागाड़ में सड़क के दोनों ओर वाटर बैरियर लगाए जाएंगे। बता दें कि बरसात के मौसम में शारदा चुंगी कॉलोनी क्षेत्र के अलावा ककरालीगेट से लेकर मां पूर्णागिरि धाम के भैरव मंदिर तक करीब 18 किमी. क्षेत्र आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है।
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