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खून की व्यवस्था होने के बाद भी नहीं होंगे ऑपरेशन
Updated Sat, 24 Jun 2017 11:27 PM IST
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चंपावत। आठ डॉक्टरों के तबादला आदेश के बावजूद जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होने की बहुत उम्मीद नहीं है। खासकर जिले में खून की व्यवस्था होने के बावजूद ऑपरेशन मुमकिन नहीं है। इसकी वजह शासन द्वारा डाक्टरों के बेतुके तरीके से किए गए तबादले हैं। कहीं सर्जन की तैनाती की गई है, तो कहीं निश्चेतक की। मगर पूरे जिले में एक भी ऐसा अस्पताल नहीं, जहां निश्चेतक, सर्जन और ब्लड स्टोरेज यूनिट तीनों चीज हों।
अक्तूबर 2012 से संचालित चंपावत जिला अस्पताल में आज तक कभी कोई ऑपरेशन नहीं हुआ। इसकी वजह जिले में रक्त कोष (ब्लड बैंक) का न होना था। लेकिन अब खून की व्यवस्था होने के बाद भी न जिला अस्पताल में और न ही जिले के किसी अस्पताल में ऑपरेशन हो पा रहे हैं। जिला में जब सर्जन, गाइनोलॉजिस्ट, निश्चेतक तीनों थे, तो ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू नहीं हो सकी थी। पिछले महीने यहां ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू हुई, तो अब निश्चेतक का यहां से तबादला दूसरे जिले में कर दिया गया। अब जिला अस्पताल में सर्जन तो हैं, लेकिन ऑपरेशन से पूर्व मरीज को बेहोश करने वाले निश्चेतक नहीं होंगे। वहीं टनकपुर के संयुक्त अस्पताल में निश्चेतक तो है, लेकिन यहां सर्जन नहीं है। इसी तरह लोहाघाट में अभी न सर्जन है और नहीं निश्चेतक। मगर यहां दोनों डॉक्टरों के लिए स्थानांतरण आदेश हुए हैं। पर स्थानांतरित दोनों डॉक्टरों द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के बाद भी रक्त की कमी से लोहाघाट में ऑपरेशन होना आसान नहीं होंगे।
इन हालातों में लोगों को ऑपरेशन की जरूरत होने पर या तो दूसरे जिले के सरकारी अस्पताल की दौड़ लगानी होगी अथवा प्राइवेट अस्पतालों में जेब ढीली करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस बोहरा का कहना है कि जिले में ऑपरेशन शुरू करवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। जो भी कमी होगी, उसे दूर करने के लिए निदेशालय से आग्रह किया जाएगा।
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इनका कहना है
जिला अस्पताल में सर्जन और निश्चेतक दोनों होने के बावजूद खून की व्यवस्था नहीं होने से ऑपरेशन नहीं हो पा रहे थे। अब ब्लड स्टोरेज का संचालन होने से खून की उपलब्धता हो गई है। लेकिन निश्चेतक के तबादले से ऑपरेशन करना अब भी मुमकिन नहीं होगा। उच्चाधिकारियों से नए निश्चेतक की तैनाती के लिए आग्रह किया जा रहा है।
डॉ.आरके जोशी
मुख्य चिकित्साधीक्षक,
जिला अस्पताल, चंपावत।
अक्तूबर 2012 से संचालित चंपावत जिला अस्पताल में आज तक कभी कोई ऑपरेशन नहीं हुआ। इसकी वजह जिले में रक्त कोष (ब्लड बैंक) का न होना था। लेकिन अब खून की व्यवस्था होने के बाद भी न जिला अस्पताल में और न ही जिले के किसी अस्पताल में ऑपरेशन हो पा रहे हैं। जिला में जब सर्जन, गाइनोलॉजिस्ट, निश्चेतक तीनों थे, तो ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू नहीं हो सकी थी। पिछले महीने यहां ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू हुई, तो अब निश्चेतक का यहां से तबादला दूसरे जिले में कर दिया गया। अब जिला अस्पताल में सर्जन तो हैं, लेकिन ऑपरेशन से पूर्व मरीज को बेहोश करने वाले निश्चेतक नहीं होंगे। वहीं टनकपुर के संयुक्त अस्पताल में निश्चेतक तो है, लेकिन यहां सर्जन नहीं है। इसी तरह लोहाघाट में अभी न सर्जन है और नहीं निश्चेतक। मगर यहां दोनों डॉक्टरों के लिए स्थानांतरण आदेश हुए हैं। पर स्थानांतरित दोनों डॉक्टरों द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के बाद भी रक्त की कमी से लोहाघाट में ऑपरेशन होना आसान नहीं होंगे।
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इन हालातों में लोगों को ऑपरेशन की जरूरत होने पर या तो दूसरे जिले के सरकारी अस्पताल की दौड़ लगानी होगी अथवा प्राइवेट अस्पतालों में जेब ढीली करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस बोहरा का कहना है कि जिले में ऑपरेशन शुरू करवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। जो भी कमी होगी, उसे दूर करने के लिए निदेशालय से आग्रह किया जाएगा।
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इनका कहना है
जिला अस्पताल में सर्जन और निश्चेतक दोनों होने के बावजूद खून की व्यवस्था नहीं होने से ऑपरेशन नहीं हो पा रहे थे। अब ब्लड स्टोरेज का संचालन होने से खून की उपलब्धता हो गई है। लेकिन निश्चेतक के तबादले से ऑपरेशन करना अब भी मुमकिन नहीं होगा। उच्चाधिकारियों से नए निश्चेतक की तैनाती के लिए आग्रह किया जा रहा है।
डॉ.आरके जोशी
मुख्य चिकित्साधीक्षक,
जिला अस्पताल, चंपावत।