{"_id":"5c291354bdec22571e0f9298","slug":"121546195796-champawat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब संवरेगा 1920 में बना कलढुंगा का डाकबंगला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब संवरेगा 1920 में बना कलढुंगा का डाकबंगला
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चंपावत। काली नदी के पास कलढुंगा गांव में 1920 में बने डाक बंगले को पर्यटन सर्किट में शामिल किया गया है। पर्यटन विभाग ने कार्बेट ट्रेल के साथ ही इस बंगले को सहेजने का प्रस्ताव तैयार किया है।
प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट के मुताबिक महज आठ हजार रुपये में बने इस डाकबंगले में चूका में आदमखोर बाघ को मारने के दौरान जिम कार्बेट ने यहां 1938-39 में कई रातें बिताईं थीं। अंग्रेजों ने जब यह बंगला बनाया था, तब यहां टनकपुर से 33 किमी पैदल चलकर पहुंचना पड़ता था। अब जिम कार्बेट ट्रेल के साथ इस बंगले को भी सहेजने का प्रस्ताव है। जिम कर्बेट ट्रेल के अलावा स्वामी विवेकानंद ट्रेल, मां पूर्णागिरि धाम, देवीधुरा, सिलनटाक चाय बागान, बालेश्वर, ऋषेश्वर, मायावती आश्रम, एकहथिया नौला, बाणासुर किला, चंडालकोट सहित कई स्थलों को जोड़ते हुए पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव है।
ईको पर्यटन सर्किट से चंपावत जिले के पर्यटन को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद यह जिला प्रमुख पर्यटक स्थलों में शुमार हो सकेगा।
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सुरेंद्र नारायण पांडेय, जिलाधिकारी, चंपावत।
डॉ. मॉरिस के बंगले में पर्यटन योजना शुरू करने का प्रस्ताव नहीं
चंपावत। एबटमाउंट में डॉ. मॉरिस के बंगले में पर्यटन योजना शुरू करने का पर्यटन विभाग का कोई प्रस्ताव नहीं है। जिला पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट का कहना है कि एबटमाउंट में डॉ. मॉरिस का बंगला निजी संपत्ति है। इसमें किसी तरह की पर्यटन योजना शुरू करने का प्रस्ताव नहीं है। अलबत्ता एबटमाउंट में इको हट में आने वाले पर्यटकों को आसपास बने चर्च, अस्पताल आदि की जानकारी दी जाएगी। एबट माउंट में ईको हट का बचा हुआ काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
यहां आठ ईको हट हैं और व्यू प्वाइंट से हिम दर्शन भी किया जा सकता है। एबटमाउंट को ईको फ्रेंडली टूरिज्म के लिए चयनित किया गया था। भारत सरकार की पर्यटन परियोजना में इसके लिए 4.95 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। चार वर्ष तक काम लटके रहने के बाद मौजूदा वित्त वर्ष में जिला प्लान से मिली रकम से बकाया काम शुरू किया जा रहा है।
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प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट के मुताबिक महज आठ हजार रुपये में बने इस डाकबंगले में चूका में आदमखोर बाघ को मारने के दौरान जिम कार्बेट ने यहां 1938-39 में कई रातें बिताईं थीं। अंग्रेजों ने जब यह बंगला बनाया था, तब यहां टनकपुर से 33 किमी पैदल चलकर पहुंचना पड़ता था। अब जिम कार्बेट ट्रेल के साथ इस बंगले को भी सहेजने का प्रस्ताव है। जिम कर्बेट ट्रेल के अलावा स्वामी विवेकानंद ट्रेल, मां पूर्णागिरि धाम, देवीधुरा, सिलनटाक चाय बागान, बालेश्वर, ऋषेश्वर, मायावती आश्रम, एकहथिया नौला, बाणासुर किला, चंडालकोट सहित कई स्थलों को जोड़ते हुए पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव है।
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ईको पर्यटन सर्किट से चंपावत जिले के पर्यटन को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद यह जिला प्रमुख पर्यटक स्थलों में शुमार हो सकेगा।
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सुरेंद्र नारायण पांडेय, जिलाधिकारी, चंपावत।
डॉ. मॉरिस के बंगले में पर्यटन योजना शुरू करने का प्रस्ताव नहीं
चंपावत। एबटमाउंट में डॉ. मॉरिस के बंगले में पर्यटन योजना शुरू करने का पर्यटन विभाग का कोई प्रस्ताव नहीं है। जिला पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट का कहना है कि एबटमाउंट में डॉ. मॉरिस का बंगला निजी संपत्ति है। इसमें किसी तरह की पर्यटन योजना शुरू करने का प्रस्ताव नहीं है। अलबत्ता एबटमाउंट में इको हट में आने वाले पर्यटकों को आसपास बने चर्च, अस्पताल आदि की जानकारी दी जाएगी। एबट माउंट में ईको हट का बचा हुआ काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
यहां आठ ईको हट हैं और व्यू प्वाइंट से हिम दर्शन भी किया जा सकता है। एबटमाउंट को ईको फ्रेंडली टूरिज्म के लिए चयनित किया गया था। भारत सरकार की पर्यटन परियोजना में इसके लिए 4.95 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। चार वर्ष तक काम लटके रहने के बाद मौजूदा वित्त वर्ष में जिला प्लान से मिली रकम से बकाया काम शुरू किया जा रहा है।