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हनुमानगढ़ी की तर्ज पर खेतखेड़ा में हो रहा भू-कटाव
Updated Sat, 14 Jul 2018 10:56 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)। भारी बारिश होने और शारदा के उफान पर आने से खेतखेड़ा में वर्ष 2013 में हनुमानगढ़ी में हुई तबाही जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। पश्चिमी छोर पर प्रवाहित शारदा की मुख्य धारा का रुख खेतखेड़ा की तरफ मुड़ने और तेज रफ्तार हो रहे भू-कटाव से ये हालात पैदा हो रहे हैं। ग्रामीण जहां चिंतित हैं, वहीं प्रशासन के भी हाथ-पांव फूले हैं। अलबत्ता सिंचाई विभाग ने कटाव के रोकथाम को वायरक्रेटों का निर्माण शुरू कर दिया है।
वर्ष 2013 की आपदा झेल चुके खेतखेड़ा समेत नदी-नालों के किनारे बसे गांवों के लोग मानसूनकाल से पहले ही भू-कटाव की मांगें उठाते रहे, लेकिन शासन-प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। अब मानसूनकाल शुरू हुआ तो नदी-नालों के उफान से हो रहे भू-कटाव की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक अमला हरकत में आया है।
बता दें कि इस बार उफनाई शारदा ने 2013 में हनुमानगढ़ी की ओर किए कटाव की तर्ज पर ही खेतखेड़ा की ओर तेजी से कटाव शुरू किया है। हर दिन पांच से दस फुट भूमि नदी में समां रही है। इधर, पिछले दिनों कटाव क्षेत्र के स्थलीय निरीक्षण के बाद डीएम डॉ. अहमद इकबाल के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने खेतखेड़ा कटाव क्षेत्र में वायरक्रेट लगाकर बचाव कार्य शुरू कर दिया है। सिंचाई विभाग के एई आरके यादव ने बताया कि कटाव रोकने को वायरक्रेट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
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वर्ष 2013 की आपदा झेल चुके खेतखेड़ा समेत नदी-नालों के किनारे बसे गांवों के लोग मानसूनकाल से पहले ही भू-कटाव की मांगें उठाते रहे, लेकिन शासन-प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। अब मानसूनकाल शुरू हुआ तो नदी-नालों के उफान से हो रहे भू-कटाव की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक अमला हरकत में आया है।
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बता दें कि इस बार उफनाई शारदा ने 2013 में हनुमानगढ़ी की ओर किए कटाव की तर्ज पर ही खेतखेड़ा की ओर तेजी से कटाव शुरू किया है। हर दिन पांच से दस फुट भूमि नदी में समां रही है। इधर, पिछले दिनों कटाव क्षेत्र के स्थलीय निरीक्षण के बाद डीएम डॉ. अहमद इकबाल के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने खेतखेड़ा कटाव क्षेत्र में वायरक्रेट लगाकर बचाव कार्य शुरू कर दिया है। सिंचाई विभाग के एई आरके यादव ने बताया कि कटाव रोकने को वायरक्रेट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
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