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अब नहीं उमड़ती है चंपावत के भैया दूज मेले में भीड़
Updated Sat, 21 Oct 2017 10:03 PM IST
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चंपावत। जिला मुख्यालय में भैया दूज पर आयोजित किया जाने वाला मेला अब साल दर साल अतीत के हाशिए में सिमटते जा रहा है। कभी चाराल क्षेत्र के गांवों का प्रमुख मेला होने के रूप में प्रसिद्ध रह चुके चंपावत में लगने वाले भैया दूज मेले में अब भीड़ नहीं के बराबर उमड़ती है। मुख्यालय में इस बार भी भैया दूज का मेला फीका रहा। खरीददारों की बेहद कम संख्या में आने के कारण बाहरी क्षेत्रों से आए व्यापारियों को मायूसी का सामना करना पड़ा।
गौरतलब है कि करीब डेढ़ दशक पूर्व तक भैया दूज का मेला खर्ककार्की के समीप स्थित बग्वालीचौड़ में आयोजित किया जाता था। लेकिन बग्वालीचौड़ में आवासीय भवनों के बनने के बाद मेले का आयोजन धीरे धीरे मुख्य बाजार के मोटर स्टेशन में आयोजित किया जाने लगा है। मेले में पीलीभीत, बरेली, रामपुर, लखीमपुर, बदायूं आदि से बड़ी संख्या में व्यापारी यहां पहुंचते हैं। लेकिन बीते चार पांच सालों से मेले में भीड़ नहीं आने के कारण बाहरी क्षेत्रों से पहुंचे व्यापारियों के हाथ मायूसी ही लग रही है। इस बार भी व्यापारियों के साथ ऐसा ही हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस माह लगातार धनतेरस, दीपावली आदि त्योहारों का सिलसिला होने के कारण भैया दूज मेले में खरीददारों की क्रय शक्ति कम हो गई है।
पूर्व में स्थानीय उत्पाद होते थे मेले का मुख्य आकर्षण
चंपावत। डेढ़ दशक पूर्व तक लगने वाले भैया दूज मेले की पहचान स्थानीय उत्पादों के मुख्य आकर्षण के रूप में होती थी। आसपास के गांवों से केले, अमरूद, अदरख, अनार, गडेरी, हल्दी, मिर्च आदि लेकर बड़ी संख्या में काश्तकार मेले में प्रतिभाग करते थे। व्यापार संघ अध्यक्ष अमरनाथ सक्टा और पूर्व सैनिक लक्ष्मी लाल साह का कहना है कि उन्होंने स्वयं कई बार मेले में स्थानीय उत्पादों का आनंद उठाया था। लेकिन अब मेले की केवल स्मृतियां ही शेष रह गई हैं।
गौरतलब है कि करीब डेढ़ दशक पूर्व तक भैया दूज का मेला खर्ककार्की के समीप स्थित बग्वालीचौड़ में आयोजित किया जाता था। लेकिन बग्वालीचौड़ में आवासीय भवनों के बनने के बाद मेले का आयोजन धीरे धीरे मुख्य बाजार के मोटर स्टेशन में आयोजित किया जाने लगा है। मेले में पीलीभीत, बरेली, रामपुर, लखीमपुर, बदायूं आदि से बड़ी संख्या में व्यापारी यहां पहुंचते हैं। लेकिन बीते चार पांच सालों से मेले में भीड़ नहीं आने के कारण बाहरी क्षेत्रों से पहुंचे व्यापारियों के हाथ मायूसी ही लग रही है। इस बार भी व्यापारियों के साथ ऐसा ही हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस माह लगातार धनतेरस, दीपावली आदि त्योहारों का सिलसिला होने के कारण भैया दूज मेले में खरीददारों की क्रय शक्ति कम हो गई है।
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पूर्व में स्थानीय उत्पाद होते थे मेले का मुख्य आकर्षण
चंपावत। डेढ़ दशक पूर्व तक लगने वाले भैया दूज मेले की पहचान स्थानीय उत्पादों के मुख्य आकर्षण के रूप में होती थी। आसपास के गांवों से केले, अमरूद, अदरख, अनार, गडेरी, हल्दी, मिर्च आदि लेकर बड़ी संख्या में काश्तकार मेले में प्रतिभाग करते थे। व्यापार संघ अध्यक्ष अमरनाथ सक्टा और पूर्व सैनिक लक्ष्मी लाल साह का कहना है कि उन्होंने स्वयं कई बार मेले में स्थानीय उत्पादों का आनंद उठाया था। लेकिन अब मेले की केवल स्मृतियां ही शेष रह गई हैं।
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