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चंपावत में ही खतरे वाले 12 पेड़ों को कटान का इंतजार
Fri, 01 Mar 2019 10:14 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Fri, 01 Mar 2019 10:14 PM IST
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निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में चंपावत नगर क्षेत्र में खतरे की जद में आने वाले पेड़।
- फोटो : अमर उजाला
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जिस वन विभाग को पेड़ों का निस्तारण करना है वही खतरनाक बने पेड़ों को नहीं कटवा पा रहा है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारहमासी मार्ग पर शहर से बमुश्किल डेढ़ किलोमीटर दूर वन विभाग के कार्यालय भवन के आसपास खतरे वाले 12 पेड़ छपान के बावजूद नहीं कट सके हैं। इन पेड़ों से आवाजाही में खतरा बना हुआ है।
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150 किलोमीटर लंबे बारहमासी मार्ग पर बीते पांच दिनों में अब तक वाहनों पर पेड़ और बोल्डर गिरने की दो घटनाएं हो चुकी हैं। 24 फरवरी को तिलौन में कार पर पेड़ गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई। जबकि 28 फरवरी को मटेला में रोडवेज बस पर बोल्डर गिरने से 24 यात्री जख्मी हो गए थे।
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इसी रूट पर चंपावत के दो किमी के दायरे में खतरे वाले 40 पेड़ थे। इनमें से मात्र 28 पेड़ ही कट सके हैं। शेष 12 पेड़ यहां से गुजरने वालों के लिए खतरा बने हुए हैं। पूर्व ब्लाक प्रमुख बहादुर फर्त्याल, प्रकाश सहित कई लोगों का कहना है कि इन पेड़ों को हटाने के लिए कई बार आग्रह भी किया जा चुका है लेकिन अभी तक ये पेड़ ज्यों के त्यों हैं। इसी तरह चंपावत से सात किमी दूर मानेश्वर के पास भी बारहमासी मार्ग पर कटिंग से गिर रहा मलबा लोगों के लिए खतरा बना हुआ है।
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कैलाश चंद्र तिवारी, वन क्षेत्राधिकारी, चंपावत ने बताया कि बारहमासी मार्ग पर वन विभाग कार्यालय के आसपास खतरे वाले पेड़ों को काटने के लिए महकमे ने छपान किया था। वन निगम ने इनमें से 12 पेड़ों को अभी नहीं काटा है। इन पेड़ों को तुरंत काटने के लिए पत्र भेजा गया है।
13 किमी के फासले को तय करने में लग रहे डेढ़ घंटे
बारहमासी मार्ग पर चंपावत-लोहाघाट के बीच की महज 13 किलोमीटर की दूरी को तय करना लोगों के लिए अब चुनौती बन रहा है। बमुश्किल 30 मिनट में पूरा होने वाला सफर इन दिनों रोड कटिंग के चलते डेढ़ घंटे में पूरा हो रहा है। शुक्रवार को भी इस मार्ग पर दिनभर में कई बार जाम लगा।