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कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल पहुंच रहे बच्चे
Updated Fri, 03 Aug 2018 11:04 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)। नेपाल सीमा पर सजग प्रहरी की भूमिका निभा रहे थपलियालखेड़ा गांव के विकास की बात तो दूर शिक्षा व्यवस्था के हाल भी ठीक नहीं है। बिजली, पानी और चलने को रास्ते के साथ ही गांव में शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल है। टिनशेड में चल रहे राजकीय प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रहे बच्चे और शिक्षक इन दिनों बारिश के कारण कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल पहुंचने को विवश हैं।
थपलियालखेड़ा गांव तीन छोर से नेपाल सीमा से घिरा है। करीब ढाई सौ की आबादी वाले इस गांव के लोग सीमा पर सजग प्रहरी की भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन वन भूमि पर बसा होने के कारण आज भी गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन बिता रहे हैं। बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तो दूर बच्चे शिक्षा के लिए भी कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
गांव में प्राथमिक स्कूल तो है, लेकिन स्कूल का अपना भवन नहीं है। आठ साल से विद्यालय टिनशेड में संचालित हो रहा है। इतना ही नहीं इन दिनों बच्चों और शिक्षकों को कीचड़ भरे रास्ते से जैसे-तैसे स्कूल आना पड़ रहा है। विद्यालय के सहायक अध्यापक गोविंद सिंह का कहना है कि सामान्य दिनों में तो स्कूल आने-जाने में परेशानी नहीं होती है, लेकिन बरसात के दिनों में कीचड़ और जलभराव के कारण बच्चों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है।
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थपलियालखेड़ा गांव तीन छोर से नेपाल सीमा से घिरा है। करीब ढाई सौ की आबादी वाले इस गांव के लोग सीमा पर सजग प्रहरी की भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन वन भूमि पर बसा होने के कारण आज भी गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन बिता रहे हैं। बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तो दूर बच्चे शिक्षा के लिए भी कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
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गांव में प्राथमिक स्कूल तो है, लेकिन स्कूल का अपना भवन नहीं है। आठ साल से विद्यालय टिनशेड में संचालित हो रहा है। इतना ही नहीं इन दिनों बच्चों और शिक्षकों को कीचड़ भरे रास्ते से जैसे-तैसे स्कूल आना पड़ रहा है। विद्यालय के सहायक अध्यापक गोविंद सिंह का कहना है कि सामान्य दिनों में तो स्कूल आने-जाने में परेशानी नहीं होती है, लेकिन बरसात के दिनों में कीचड़ और जलभराव के कारण बच्चों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है।
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