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तो क्या औचित्य है चंपावत जिले के गेहूं खरीद केंद्र का?
Updated Sat, 28 Apr 2018 11:16 PM IST
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चंपावत। चार वर्ष बीत गए, मगर एक कुंतल गेहूं की सरकारी खरीद चंपावत जिले के सरकारी खरीद केंद्र में नहीं हो सकी है। इस बार भी अभी तक गेहूं की खरीद नहीं हो सकी है। चार सप्ताह बीतने के बावजूद टनकपुर और बनबसा के सरकारी क्रय केंद्र गेहूं बेचने के लिए आने वाले की बांट जोह रहे हैं।
सहकारिता विभाग ने गेहूं की खरीद के लिए पहली अप्रैल से गेहूं क्रय केंद्र खोला है। इस बार गेहूं का दाम पिछले साल की अपेक्षा 110 रुपये ज्यादा 1735 रुपये कुंतल रखा गया है। इसके बावजूद चार सप्ताह बीतने के बावजूद गेहूं क्रय केंद्रों में कोई भी किसान गेहूं नहीं लाया है। जबकि कुमाऊं मंडल से अब तक 2.61 लाख कुंतल गेहूं की खरीद हो चुकी है। किसानों का कहना है कि कम दाम और भुगतान मिलने में देरी की वजह से वे यहां के बजाय खुले बाजार में गेहूं बेंचते हैं। मगर क्रय केंद्रों में किसानों के नहीं आने की यह तस्वीर पहली बार की नहीं है। 2014 से चंपावत जिले में एक भी कुंतल गेहूं नहीं खरीदा जा सका। हर बार क्रय केंद्र खोले जाते हैं और फिर करीब तीन माह बाद उन्हें समेट दिया जाता है। इस कवायद में सरकारी धन की बर्बादी जरूर होती है। सहकारिता विभाग के जिला सहायक निबंधक पान सिंह राणा का कहना है कि पहली अप्रैल से खुले ये केंद्र जून तक खुले रहेंगे। इन केंद्रों को खोलने से लेकर कर्मियों की तैनाती पर ही मोटी रकम खर्च होती है।
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मैदानी क्षेत्र में होती है गेहूं का बहुतायत उत्पादन
जिले के पहाड़ी हिस्से से ज्यादा मैदानी क्षत्र टनकपुर-बनबसा में गेहूं की पैदावार होती है। जिले में पिछले साल करीब 7300 हेक्टेयर एरिया में गेहूं बोए गए। जिसमें तकरीबन 8500 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ। इसमें से दो-तिहाई से ज्यादा पैदावार मैदान में हुई।
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