{"_id":"5f5f7ba28ebc3e5aa12f44f3","slug":"with-the-weather-people-started-reaching-satopanth-gopeshwar-news-drn3560882131","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौसम ने दिया साथ तो सतोपंथ पहुंचने लगे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौसम ने दिया साथ तो सतोपंथ पहुंचने लगे लोग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदरीनाथ से 25 किमी दूर सतोपंत में प्राकृतिक झील के साथ ही हिमालय की सुंदरता श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है। सबसे कठिन ट्रेक में शुमार इस ट्रेक पर लॉकडाउन के बाद और बारिश के कारण अभी तक कोई श्रद्धालु और पर्यटक यहां नहीं पहुंचा था लेकिन अब धीरे-धीरे स्थानीय ट्रेकर और लोग यहां पहुंचने लगे हैं।
समुद्र तल से 4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सतोपंत ताल का सफर माणा से होकर गुजरता है। बसुधारा होकर इस ट्रेक पर जाया जाता है। हर साल यात्रा सीजन पर इस ट्रेक पर बड़ी संख्या में लोग जाते हैं, लेकिन इस साल कोरोना के कारण यात्रा देर से शुरू हुई और बरसात के कारण सीमित संख्या में ही यात्री बदरीनाथ धाम पहुंचे। बाहर से आया कोई श्रद्धालु और ट्रेक इस साल अभी तक इस ट्रेक पर नहीं गया। अब मौसम साफ होने पर स्थानीय लोग इस ट्रेक पर जाने लगे हैं। हाल ही में सतोपंत से लौटे सुशील पंवार बताते हैं कि मौसम साफ होने से यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखकर मन को शांति मिली है। यह ट्रेक भी साफ सुथरा है।
सतोपंत झील का है आध्यात्मिक महत्व
त्रिकोणीय आकार की सतोपंत झील प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर तो है ही साथ ही इसका धार्मिक महत्व भी है। माना जाता है कि इस झील के तीनों कोनों में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने तपस्या की थी। एकादशी के दिन त्रिदेव यहां स्नान करते हैं। इस दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
समुद्र तल से 4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सतोपंत ताल का सफर माणा से होकर गुजरता है। बसुधारा होकर इस ट्रेक पर जाया जाता है। हर साल यात्रा सीजन पर इस ट्रेक पर बड़ी संख्या में लोग जाते हैं, लेकिन इस साल कोरोना के कारण यात्रा देर से शुरू हुई और बरसात के कारण सीमित संख्या में ही यात्री बदरीनाथ धाम पहुंचे। बाहर से आया कोई श्रद्धालु और ट्रेक इस साल अभी तक इस ट्रेक पर नहीं गया। अब मौसम साफ होने पर स्थानीय लोग इस ट्रेक पर जाने लगे हैं। हाल ही में सतोपंत से लौटे सुशील पंवार बताते हैं कि मौसम साफ होने से यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखकर मन को शांति मिली है। यह ट्रेक भी साफ सुथरा है।
विज्ञापन
सतोपंत झील का है आध्यात्मिक महत्व
त्रिकोणीय आकार की सतोपंत झील प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर तो है ही साथ ही इसका धार्मिक महत्व भी है। माना जाता है कि इस झील के तीनों कोनों में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने तपस्या की थी। एकादशी के दिन त्रिदेव यहां स्नान करते हैं। इस दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
विज्ञापन