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वर्दी पहनकर गया था, तिरंगा ओढ़कर आया हूं
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बंड मेले के तीसरे दिन रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। सम्मेलन में पहुंचे विभिन्न जगहों के कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं से समा बांध दिया। हालत बद से बदतर हो रहें हैं, गांव के गांव खंडहर हो रहे हैं... कविता से पलायन की पीड़ा और वर्दी पहनकर गया था, तिरंगा ओढ़कर आया हूं ... से शहीदों की वीरता का वर्णन किया। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ हंस फाउंडेशन के उत्तराखंड प्रभारी पदमेंद्र सिंह बिष्ट ने किया। उन्होंने कहा कि हंस फाउंडेशन पीपलकोटी स्थित विवेकानंद चिकित्सालय को हरसंभव मदद करेगा। भविष्य में सतपुली की तरह यहां भी आधुनिक सुविधाओं वाला अस्पताल स्थापित किया जाएगा। मेला पंडाल में कवि और उत्तराखंड बार एसोसिएशन के महासचिव जयवर्द्धन कांडपाल ने हालत बद से बदतर हो रहे हैं, गांव के गांव खंडहर हो रहें हैं... कविता से कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से पहाड़ की पलायन की पीड़ा को उजागर किया। उन्होंने गांव से रोशनी लेकर, वो शहर को जगमग कर रहे हैं... और मेरी स्याही बूंद बूंद से लिखना चाहेगी कुर्बानी... कविता का पाठ भी किया। कवि अविनाश मलासी ने वर्दी पहनकर गया था, तिरंगा ओढ़कर आया हूं... कविता के माध्यम से देश की सरहदों पर वीरगति को प्राप्त हुए वीर सैनिकों की वीरता का वर्णन किया। इसी प्रकार उत्तरकाशी के कवि सोमेश बहुगुणा ने हे माटी का राम, रावण स्वीकार नहीं होगा..., मैं कलम से करूंगा कारीगरी..., कितना चंचल था मन मेरा... कविता पाठ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। टिहरी से पहुंचे कवि धर्मेंद्र उनियाल ने मां झूठ भी कितनी सफाई से बोलती है... और मेरे घर के नमक में अभी खुद्दारी बहुत है... कविता का पाठ किया। कवि श्रीकांत श्री ने इसी धरा पर भगीरथ ने तपस्या की थी... कविता से उत्तराखंड का गुणगान किया। शशि देवली ने मैं बात उस माटी की करती, जिसका कण कण ज्वाला है... कविता का पाठ किया। कवि सुनील कोठियाल ने भाई की कलाई पर जो रक्षा सूत्र बांधा था... कविता प्रस्तुत की।
ढाई फीट बर्फ में चलकर पहुंचे मेले, दी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति
दशोली ब्लाक के सुदूरवर्ती ईराणी गांव के स्कूली बच्चे रविवार को लगभग ढाई फीट बर्फ में पैदल चलकर बंड मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने पहुंचे। दर्शकों ने बच्चों की ओर से दी गई प्रस्तुतियों की सराहना की। ईराणी गांव के ग्राम प्रधान मोहन सिंह नेगी ने बताया कि स्कूली बच्चे कई दिनों से बंड मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक क्षेत्र में बर्फबारी हो गई, लेकिन बच्चों का हौंसला नहीं डिगा और वे ढाई फीट बर्फ में चलकर मेले में कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने पहुंचे। छात्र-छात्राओं ने मां नंदा ऊंचा कैलाशे की... गीत के साथ ही कई गढ़वाली गीतों की प्रस्तुति दी।
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कार्यक्रम का शुभारंभ हंस फाउंडेशन के उत्तराखंड प्रभारी पदमेंद्र सिंह बिष्ट ने किया। उन्होंने कहा कि हंस फाउंडेशन पीपलकोटी स्थित विवेकानंद चिकित्सालय को हरसंभव मदद करेगा। भविष्य में सतपुली की तरह यहां भी आधुनिक सुविधाओं वाला अस्पताल स्थापित किया जाएगा। मेला पंडाल में कवि और उत्तराखंड बार एसोसिएशन के महासचिव जयवर्द्धन कांडपाल ने हालत बद से बदतर हो रहे हैं, गांव के गांव खंडहर हो रहें हैं... कविता से कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से पहाड़ की पलायन की पीड़ा को उजागर किया। उन्होंने गांव से रोशनी लेकर, वो शहर को जगमग कर रहे हैं... और मेरी स्याही बूंद बूंद से लिखना चाहेगी कुर्बानी... कविता का पाठ भी किया। कवि अविनाश मलासी ने वर्दी पहनकर गया था, तिरंगा ओढ़कर आया हूं... कविता के माध्यम से देश की सरहदों पर वीरगति को प्राप्त हुए वीर सैनिकों की वीरता का वर्णन किया। इसी प्रकार उत्तरकाशी के कवि सोमेश बहुगुणा ने हे माटी का राम, रावण स्वीकार नहीं होगा..., मैं कलम से करूंगा कारीगरी..., कितना चंचल था मन मेरा... कविता पाठ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। टिहरी से पहुंचे कवि धर्मेंद्र उनियाल ने मां झूठ भी कितनी सफाई से बोलती है... और मेरे घर के नमक में अभी खुद्दारी बहुत है... कविता का पाठ किया। कवि श्रीकांत श्री ने इसी धरा पर भगीरथ ने तपस्या की थी... कविता से उत्तराखंड का गुणगान किया। शशि देवली ने मैं बात उस माटी की करती, जिसका कण कण ज्वाला है... कविता का पाठ किया। कवि सुनील कोठियाल ने भाई की कलाई पर जो रक्षा सूत्र बांधा था... कविता प्रस्तुत की।
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ढाई फीट बर्फ में चलकर पहुंचे मेले, दी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति
दशोली ब्लाक के सुदूरवर्ती ईराणी गांव के स्कूली बच्चे रविवार को लगभग ढाई फीट बर्फ में पैदल चलकर बंड मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने पहुंचे। दर्शकों ने बच्चों की ओर से दी गई प्रस्तुतियों की सराहना की। ईराणी गांव के ग्राम प्रधान मोहन सिंह नेगी ने बताया कि स्कूली बच्चे कई दिनों से बंड मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक क्षेत्र में बर्फबारी हो गई, लेकिन बच्चों का हौंसला नहीं डिगा और वे ढाई फीट बर्फ में चलकर मेले में कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने पहुंचे। छात्र-छात्राओं ने मां नंदा ऊंचा कैलाशे की... गीत के साथ ही कई गढ़वाली गीतों की प्रस्तुति दी।
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