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रामणी गांव में घरों में घुसा पानी, बारिश से मची अफरातफरी

Fri, 18 Jun 2021 07:09 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 18 Jun 2021 07:09 PM IST
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Water entered the houses in Ramni village, chaos caused by rain
चमोली जिले में बृहस्पतिवार देर रात शुरू हुई बारिश शुक्रवार को दिनभर होती रही। बारिश से जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बदरीनाथ हाईवे के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को यातायात से जोड़ने वाली करीब 32 सड़कें जगह-जगह मलबा आने से बंद हो गईं, वहीं गाड-गदेरों के उफान पर आने से नदियों का जलस्तर भी बढ़ गया। घाट बाजार के बीचों बीच बह रही चुफलागाड गदेरे का जलस्तर बढ़ने से व्यापारियों व स्थानीय लोगों में दिनभर अफरा-तफरी मची रही। जबकि रामणी गांव में कई घरों में पानी घुस गया।
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शुक्रवार को दिनभर जिले में तेज बारिश होती रही, जिससे गाड-गदेरे उफान पर आ गए। घाट ब्लाक के रामणी गांव में बरसाती पानी ग्रामीणों के घरों में घुस गया। घाट मुख्य बाजार में चुफलागाड सुबह से ही उफान पर बहती रही, जिसे देख दुकानदारों व ग्रामीणों में अफरा-तफरी मची रही। लोग घरों में जाने से कतराते रहे। विभिन्न जगहों पर मलबा आने से जिले में 90 सड़कें बंद हो गई थीं और बारिश के बीच ही लोनिवि व पीएमजीएसवाई ने 58 सड़कों को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया है, जबकि 32 मार्ग अभी भी बंद हैं। वहीं मलबा आने से बदरीनाथ हाईवे बेनाकुली बैंड, लामबगड़, गुलाबकोटी और रड़ांग बैंड के समीप बंद हो गया है, जबकि हेलंग-उर्गम सड़क भी जल विद्युत परियोजना हेलंग के समीप भूस्खलन होने से करीब बीस मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही ठप पड़ गई है। पोखरी में कनकचौंरी-पोगठा, उडामांडा-रौता, उडामांडा-सिनाऊं और हापला-गुड़म मार्ग मलबा आने से बंद हो गए। क्षेत्र में लगातार बारिश से सड़कों को खोलने का काम भी शुरू नहीं हो पाया है।
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चमोली तहसील में हुई सर्वाधिक बारिश
गोपेश्वर। चमोली तहसील में सर्वाधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। यहां 67.8 मिमी बारिश हुई, जबकि जोशीमठ में 60.6 मिमी, कर्णप्रयाग में 26 मिमी, पोखरी में 30 मिमी, गैरसैंण में 59 मिमी, थराली में 31.2 मिमी और घाट में 56 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
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इंसेट
सभी तहसील, ब्लॉक और पुलिस थानों में स्थानीय स्तर पर अलर्ट जारी किया गया है। आपदा की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है। संवेदनशील जगहों पर मशीनें व मेन पावर की तैनाती की गई है। संपर्क मार्गों के बंद होने पर उन्हें तत्काल खोले जाने की कार्रवाई की जा रही है। जिन गांवों में संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं, वहां खाद्यान्न व अन्य जरूरी सामग्री की आपूर्ति की जाएगी। अगर अस्थायी रेस्क्यू सेंटर बनाने की आवश्यकता पड़ी तो उसके लिए स्कूल भवनों को भी तैयार किया गया है। - स्वाति एस भदौरिया, डीएम, चमोली।
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उफान पर बहीं नदियां
गोपेश्वर। लगातार हो रही बारिश से जिले की प्रमुख नदियां भी उफान पर हैं। हालांकि सभी नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। अलकनंदा 953.40 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे का निशान 957.42 मी. है। नंदाकिनी 868.65 मी. (खतरे का निशान 871.50 मी.) और पिंडर नदी 770.28 मीटर (खतरे का निशान 773 मी.) पर बह रही है।

श्रीनगर में चेतावनी स्तर पार कर गया अलकनंदा का जलस्तर
श्रीनगर। बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जल स्तर बढ़ गया। बढ़ते जल स्तर और नदी में आ रहे मलबे को देखते हुए श्रीनगर जल विद्युत परियोजना झील से पानी छोड़ा गया। शुक्रवार को दिनभर श्रीनगर में जलस्तर घटता-बढ़ता रहा और कई बार यहां जल स्तर चेतावनी स्तर को पार कर गया। शुक्रवार सुबह 8 बजे तक क्षेत्र में 8.4 एमएम बारिश हुई। पूर्वाह्न 11 बजे नदी का जल स्तर 544.70 मीटर था जो खतरे के निशान से 51 सेंटीमीटर नीचे था। जबकि चेतावनी स्तर 535 मीटर और खतरे का निशान 536 मीटर है।
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