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मानकों के विपरीत मॉडल स्कूल चयनित
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली
Updated Sat, 26 Mar 2016 09:55 PM IST
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शिक्षा विभाग की ओर से दूरस्थ गांवों में गुणवत्ता परक शिक्षा देने की योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं। योजना के तहत हर ब्लाक में पांच दूरस्थ स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाया जाना था, लेकिन कर्णप्रयाग ब्लाक में विभाग ने दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के बजाय सुविधाजनक स्थानों के स्कूलों का चयन कर लिया।
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ब्लाक में 50 से अधिक छात्र संख्या वाले प्राइमरी स्कूल बगोली, गांधीनगर, नैनीसैंण और गौचर हैं। इनमें बगोली और नैनीसैंण दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। यहां महज बगोली स्कूल में एक नियमित और एक शिक्षक व्यवस्था पर तैनात है, जबकि गौचर और नैनीसैंण में महज दो अध्यापक हैं। विभाग ने बगोली का प्रस्ताव मॉडल स्कूल बनाने के लिए शासन को भेजा ही नहीं और गौचर तथा नैनीसैंण को मॉडल स्कूल बना दिया।
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वहीं जूनियर स्कूल कल्याणी, तेफना और आदर्श राजकीय जूनियर स्कूल गौचर में भी 50 से अधिक छात्र संख्या है, लेकिन विभाग ने पहले से आदर्श जूनियर स्कूल गौचर को दोबारा आदर्श बनाने की सिफारिश कर दी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल तेफना और कल्याणी में जहां अपेक्षाकृत न संसाधन हैं और न शिक्षक इसे मॉडल स्कूल की श्रेणी में रख दिया।
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वहीं विभाग ने राजकीय बालिका इंटर कालेज गौचर को भी आदर्श चयनित कर दिया। वहीं भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी रमेश मैखुरी ने कहा कि विभाग की ओर से अकेले नगर पालिका क्षेत्र में तीन मॉडल स्कूल चयनित करना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
ये है मॉडल स्कूल बनने की प्राथमिकता
एक ब्लाक में मानकोनुसार दो प्राइमरी, एक जूनियर और दो इंटर कालेजों को मॉडल स्कूल के रूप में चयनित किया जाता है। 50 से अधिक छात्र संख्या वाले प्राइमरी और जूनियर में पांच-पांच शिक्षक, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशाला, सहित अन्य सुविधाएं दी जाती हैं जबकि इंटर कालेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर होना प्राथमिकता है।