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डिम्मर में उमा देवी की विदाई की तैयारी शुरू
ब्यूरो/ अमर उजाला, कर्णप्रयाग
Updated Wed, 21 Dec 2016 10:40 PM IST
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कर्णप्रयाग के डिम्मर में मां उमा देवी की डोली यात्रा के दौरान अरसा बनाती महिलाएं।
- फोटो : amar ujala.
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12 वर्ष बाद आए पल खत्म होने वाले हैं। मां उमा देवी 23 दिसंबर को अपने मायके डिम्मर से विदा लेकर ससुराल कपीरी प्रस्थान करेगी, जिसके लिए डिम्मर गांव में महिलाएं कलेऊ (अरसे, रोट, हलवा) तैयार कर रहे हैं। उमा देवी के ससुराली डिम्मर पहुंच चुके हैं। बृहस्पतिवार को ग्रामीण बेटी (उमा) को सोने की नथ पहनाने के साथ विदाई की बेला का शुभारंभ करेंगे।
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क्षेत्र की आराध्य देवी मां उमा की दिवारा यात्रा 12 वर्ष के अंतराल के बाद आयोजित हो रही है। 1 दिसंबर को देवी गर्भ गृह से बाहर निकली थी। 25 नवंबर को नगर भ्रमण के बाद 6 दिसंबर को अपने मायके डिम्मर पहुंची। तब से यहां देवी के दर्शनों को हजारों ग्रामीण पहुंच चुके हैं। डिम्मर गांव देवी उमा का मायका माना जाता है। ग्रामीण शैलेंद्र प्रसाद डिमरी बताते हैं कि उमा देवी डिम्मर गांव की ध्यांण है। जैसे ग्रामीण अपने बेटी को विदा करते हैं, ठीक उसी रूप से उमा को भी विदा किया जाता है।
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विदाई से पहले मां उमा को ग्रामीण नथ पहनाते हैं। जिसके बाद उमा देवी बृहस्पतिवार को उस खेत में जाती हैं, जहां उमा ने कभी खेतीबाड़ी का काम किया है। डिमरी कहते हैं कि खेत को आज भी खेतगड़ कहा जाता है। जहां विदाई से पहले की रात्रि को देवी का रात्रि विश्राम होता है।
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सुरेश डिमरी ने बताया कि उमा की विदाई के लिए गांव में बुधवार से ही महिलाएं कलेऊ तैयार करने में जुटी है। ग्रामीण कांति प्रसाद डिमरी, गणेश खंडूड़ी, सत्य प्रसाद, कमलेश्वर प्रसाद, बुद्धिराम, नंदकिशोर, अशोक कुमार, मोहन प्रसाद, विपुल आदि तैयारी में जुटे हैं। पीसी डिमरी ने बताया कि बुधवार को अंतिम सामूहिक भोग का आयोजन किया गया, जबकि बृहस्पतिवार से मां उमा की विदाई तक गांव में सामूहिक भोग का आयोजन नहीं किया जाता है।