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खेती और दुग्ध उत्पादन से मजबूत की आर्थिकी
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली।
Updated Mon, 02 Jan 2017 10:14 PM IST
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आर्थिकी का मुख्य साधन दुकानदारी होने के बावजूद गौचर नगर के बंदरखंड निवासी दिग्पाल गुसाईं ने कृषि और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में पहचान बनाई है। दिग्पाल हॉलेस्टन फ्रीजन (एचएफ) गाय पालकर दुग्ध व्यवसाय को नई ऊंचाइयां दे रहे हैं। जिन खेतों में किसान पारंपरिक तौर पर वर्ष में दो फसलों का उत्पादन करते हैं वहां दिग्पाल तीन फसलें उगाकर किसानों के लिए प्रेरणास्रोत भी बने हैं।
पहाड़ से जहां युवा आज रोजगार की तलाश में पलायन कर रहा है, वहीं गौचर में दिग्पाल गुसाईं खेती को नया आयाम दे रहे हैं। दिग्पाल गुसाईं बताते हैं कि इस वर्ष खेती में नया प्रयोग किया है। एक नाली के खेत में धान काटने के बाद उन्होंने तोड़िया (सरसों) बोई। अब सरसों कटने वाली है जिसके बाद अन्य लोगों के साथ खेत में गेहूं की बुुआई करूंगा। ऐसे में साल में तीन फसलें तैयार होंगी।
साथ ही घर के लिए सरसों से तेल बन सकेगा। यही नहीं दिग्पाल के खेतों में इन दिनों गोभी, हरी प्याज, राई सहित अन्य सब्जियां भी तैयार हैं। गुसाईं बताते हैं प्रति वर्ष सब्जी उत्पादन से 50 हजार तक की आय होती है। वर्तमान में पांच गाय पालकर पशुपालन भी कर रहे हैं, जिससे करीब 25 से 30 लीटर दूध प्रतिदिन बाजार में बिकता है।
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कोट
वर्ष 1985 से पशुपालन शुरू किया और बाद में इसे व्यवसायिक तौर पर शुरू किया। जर्सी गायों के बाद अब एचएफ गाय पाल रहा हूं। दूध बेचने पर अच्छी आय हो जाती है। लोगों के लिए खेती भी एक अच्छा स्वरोजगार हो सकता है इसलिए नकदी फसलों के उत्पादन की ओर प्रयास किया। इस बार पहाड़ से लुप्त हुआ भुजेला (पेठा) उगाया है, जिसे मिठाई बनाने और पूजा आदि के कार्यों में प्रयोग किया जाता है। अब लोग उसके बीज मांगने लगे हैं। - दिग्पाल गुसाईं, गौचर।
समय-समय पर विभाग दिग्पाल गुसाईं की मदद करता है। उद्यान प्रदर्शनियों में भी गुसाईं की पैदावार को रखा जाता है। नकदी कृषि के क्षेत्र में दिग्पाल कई सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। - सीपी चमोली, -प्रभारी उद्यान केंद्र गौचर चमोली।
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पहाड़ से जहां युवा आज रोजगार की तलाश में पलायन कर रहा है, वहीं गौचर में दिग्पाल गुसाईं खेती को नया आयाम दे रहे हैं। दिग्पाल गुसाईं बताते हैं कि इस वर्ष खेती में नया प्रयोग किया है। एक नाली के खेत में धान काटने के बाद उन्होंने तोड़िया (सरसों) बोई। अब सरसों कटने वाली है जिसके बाद अन्य लोगों के साथ खेत में गेहूं की बुुआई करूंगा। ऐसे में साल में तीन फसलें तैयार होंगी।
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साथ ही घर के लिए सरसों से तेल बन सकेगा। यही नहीं दिग्पाल के खेतों में इन दिनों गोभी, हरी प्याज, राई सहित अन्य सब्जियां भी तैयार हैं। गुसाईं बताते हैं प्रति वर्ष सब्जी उत्पादन से 50 हजार तक की आय होती है। वर्तमान में पांच गाय पालकर पशुपालन भी कर रहे हैं, जिससे करीब 25 से 30 लीटर दूध प्रतिदिन बाजार में बिकता है।
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वर्ष 1985 से पशुपालन शुरू किया और बाद में इसे व्यवसायिक तौर पर शुरू किया। जर्सी गायों के बाद अब एचएफ गाय पाल रहा हूं। दूध बेचने पर अच्छी आय हो जाती है। लोगों के लिए खेती भी एक अच्छा स्वरोजगार हो सकता है इसलिए नकदी फसलों के उत्पादन की ओर प्रयास किया। इस बार पहाड़ से लुप्त हुआ भुजेला (पेठा) उगाया है, जिसे मिठाई बनाने और पूजा आदि के कार्यों में प्रयोग किया जाता है। अब लोग उसके बीज मांगने लगे हैं। - दिग्पाल गुसाईं, गौचर।
समय-समय पर विभाग दिग्पाल गुसाईं की मदद करता है। उद्यान प्रदर्शनियों में भी गुसाईं की पैदावार को रखा जाता है। नकदी कृषि के क्षेत्र में दिग्पाल कई सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। - सीपी चमोली, -प्रभारी उद्यान केंद्र गौचर चमोली।