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Chamoli News: भूस्खलन रोकने के लिए देवता की शरण में पहुंचे टंगणी तल्ली के ग्रामीण
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पिछले 24 साल से पागलनाला में हो रहे भूस्खलन और भू-धंसाव की मार झेल रहे टंगणी तल्ली गांव के ग्रामीण अब देवी-देवताओं की शरण में पहुंच गए हैं। ग्रामीणों ने अपने आराध्य जाख देवता के नाम से भूस्खलन क्षेत्र में वन वाटिका तैयार करने की योजना बनाई। इसके बाद उन्होंने वाटिका में पौधे रोपना शुरू कर दिया। यहां विभिन्न प्रजाति के 800 पौधे लगाए जाएंगे। इससे काफी हद तक भूस्खलन रुकेगा।
टंगणी तल्ली गांव में वर्तमान में 70 परिवार रहते हैं। वर्ष 1999 से पागलनाला में हो रहा भूस्खलन और भू-कटाव ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना है। नाले के कटाव से टंगणी तल्ली गांव की कई हेक्टेयर कृषि भूमि और वन क्षेत्र भी नष्ट हो गया है। ग्राम प्रधान हीरा सिंह पंवार ने कहा कि भू-धंसाव गांव के समीप तक पहुंच गया है। भू-कटाव से गांव की कई हेक्टेयर कृषि भूमि नष्ट हो गई है। गांव को बचाने के लिए ग्रामीण आराध्य जाख देवता के पास पहुंचे और उनके नाम से वन वाटिका तैयार का निर्णय लिया। इसके तहत शनिवार को ही वाटिका में संरक्षित प्रजाति के रामबांस, बांज, उतीस, बर्सीन घास, देवदार सहित कई प्रजाति के पौधे लगाए गए। ग्रामीणों ने पागल नाला के आसपास भी वन क्षेत्र विकसित करने का संकल्प लिया। सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि भू-कटाव रोकने के लिए पौधरोपण बेहतर विकल्प है। वन वाटिका को वन क्षेत्र में भी परिवर्तित किया जाएगा। वहीं बीडीओ जोशीमठ मोहन जोशी ने कहा कि वाटिका के इर्द-गिर्द चेकडैम और बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जाएंगे। इस मौके पर परियोजना निदेशक आनंद सिंह, सरपंच कैलाश भट्ट, पाखी के ग्राम प्रधान भुवन जोशी के साथ ही महिला मंगल दल और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी मौजूद रहीं।
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टंगणी तल्ली गांव में वर्तमान में 70 परिवार रहते हैं। वर्ष 1999 से पागलनाला में हो रहा भूस्खलन और भू-कटाव ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना है। नाले के कटाव से टंगणी तल्ली गांव की कई हेक्टेयर कृषि भूमि और वन क्षेत्र भी नष्ट हो गया है। ग्राम प्रधान हीरा सिंह पंवार ने कहा कि भू-धंसाव गांव के समीप तक पहुंच गया है। भू-कटाव से गांव की कई हेक्टेयर कृषि भूमि नष्ट हो गई है। गांव को बचाने के लिए ग्रामीण आराध्य जाख देवता के पास पहुंचे और उनके नाम से वन वाटिका तैयार का निर्णय लिया। इसके तहत शनिवार को ही वाटिका में संरक्षित प्रजाति के रामबांस, बांज, उतीस, बर्सीन घास, देवदार सहित कई प्रजाति के पौधे लगाए गए। ग्रामीणों ने पागल नाला के आसपास भी वन क्षेत्र विकसित करने का संकल्प लिया। सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि भू-कटाव रोकने के लिए पौधरोपण बेहतर विकल्प है। वन वाटिका को वन क्षेत्र में भी परिवर्तित किया जाएगा। वहीं बीडीओ जोशीमठ मोहन जोशी ने कहा कि वाटिका के इर्द-गिर्द चेकडैम और बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जाएंगे। इस मौके पर परियोजना निदेशक आनंद सिंह, सरपंच कैलाश भट्ट, पाखी के ग्राम प्रधान भुवन जोशी के साथ ही महिला मंगल दल और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी मौजूद रहीं।
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