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धूमधाम से हुआ माता लक्ष्मी और नारायण भगवान का विवाह समारोह
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नंदप्रयाग में 138 साल बाद माता लक्ष्मी और भगवान नारायण का मिलन हुआ। शनिवार को आस्था और उल्लास के बीच लक्ष्मी और नारायण का विवाह कराया गया। सात गांवों के सैकड़ों श्रद्धालु इसके साक्षी बने। हिंदू रीति-रिवाज के साथ आयोजित विवाह समारोह में दिनभर भजन-कीर्तन की धूम रही।
बताया जाता है कि नंदप्रयाग के प्राचीन चंडिका मंदिर परिसर में कालांतर में लक्ष्मी-नारायण का मंदिर स्थित था। वर्ष 1884 में निजमुला घाटी में गौणा ताल के टूटने से नंदप्रयाग बाजार जलमग्न हो गया था। तब लक्ष्मी-नारायण का मंदिर भी अलकनंदा के तेज बहाव में बह गया था। नारायण भगवान की प्रतिमा को तो स्थानीय लोगों जैसे-तैसे बचा लिया था, लेकिन माता लक्ष्मी की शिला मूर्ति को नहीं बचाया जा सका। इसके बाद नारायण भगवान की प्रतिमा को चंडिका माता मंदिर परिसर में ही स्थापित कर दिया गया।
लंबे समय बाद वर्ष 2021 में नगर पंचायत नंदप्रयाग की अध्यक्ष डा. हिमानी वैष्णव की पहल पर लक्ष्मी-नारायण मंदिर का निर्माण किया गया। इसके बाद चंडिका मंदिर समिति के अध्यक्ष डा. जगदीश वैष्णव ने माता लक्ष्मी की नई शिला मूर्ति बनवाकर विधि-विधान से लक्ष्मी-नारायण विवाह का प्रस्ताव हक-हकूकधारी नंदप्रयाग, महड़बगठी, ग्वांई, सकंड, सेम, रामबोरी और मंगरोली गांव के ग्रामीणों के सम्मुख रखा। ग्रामीणों की सहमति पर शनिवार को 138 साल बाद माता लक्ष्मी और भगवान नारायण का विवाह समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद दोनों की शिला मूर्तियों को नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया।
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नगर पंचायत अध्यक्ष ड. हिमानी वैष्णव ने बताया कि नंदप्रयाग का प्राचीन लक्ष्मी-नारायण मंदिर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के 51 प्राचीन मंदिरों में शामिल है। आचार्य लक्ष्मी प्रसाद सती, जगदंबा प्रसाद, भाष्कर चमोली और भगवती सती ने मूर्ति स्थापना, प्राण-प्रतिष्ठा और विवाह संपन्न कराया।
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बताया जाता है कि नंदप्रयाग के प्राचीन चंडिका मंदिर परिसर में कालांतर में लक्ष्मी-नारायण का मंदिर स्थित था। वर्ष 1884 में निजमुला घाटी में गौणा ताल के टूटने से नंदप्रयाग बाजार जलमग्न हो गया था। तब लक्ष्मी-नारायण का मंदिर भी अलकनंदा के तेज बहाव में बह गया था। नारायण भगवान की प्रतिमा को तो स्थानीय लोगों जैसे-तैसे बचा लिया था, लेकिन माता लक्ष्मी की शिला मूर्ति को नहीं बचाया जा सका। इसके बाद नारायण भगवान की प्रतिमा को चंडिका माता मंदिर परिसर में ही स्थापित कर दिया गया।
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लंबे समय बाद वर्ष 2021 में नगर पंचायत नंदप्रयाग की अध्यक्ष डा. हिमानी वैष्णव की पहल पर लक्ष्मी-नारायण मंदिर का निर्माण किया गया। इसके बाद चंडिका मंदिर समिति के अध्यक्ष डा. जगदीश वैष्णव ने माता लक्ष्मी की नई शिला मूर्ति बनवाकर विधि-विधान से लक्ष्मी-नारायण विवाह का प्रस्ताव हक-हकूकधारी नंदप्रयाग, महड़बगठी, ग्वांई, सकंड, सेम, रामबोरी और मंगरोली गांव के ग्रामीणों के सम्मुख रखा। ग्रामीणों की सहमति पर शनिवार को 138 साल बाद माता लक्ष्मी और भगवान नारायण का विवाह समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद दोनों की शिला मूर्तियों को नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया।
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नगर पंचायत अध्यक्ष ड. हिमानी वैष्णव ने बताया कि नंदप्रयाग का प्राचीन लक्ष्मी-नारायण मंदिर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के 51 प्राचीन मंदिरों में शामिल है। आचार्य लक्ष्मी प्रसाद सती, जगदंबा प्रसाद, भाष्कर चमोली और भगवती सती ने मूर्ति स्थापना, प्राण-प्रतिष्ठा और विवाह संपन्न कराया।