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ब्रह्ममुहुर्त पर खोले गए ज्योतेश्वर महादेव मंदिर के कपाट

Sun, 13 Feb 2022 07:11 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 07:11 PM IST
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The doors of Jyoteshwar Mahadev temple were opened on Brahmamuhurta
रविवार को ब्रह्ममुहुर्त में भगवान ज्योतेश्वर मंदिर के कपाट विधि विधान के साथ खोले गए। मंदिर के कपाट खोलने के बाद शिवलिंग के ऊपर अष्टधातु के बने समपट को हटाया गया और श्रद्धालुओं ने शिवलिंग के चारों ओर जमी हरियाली के दर्शन किए।
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एक माह पहले मकर संक्रांति पर मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। रविवार को विधि विधान के साथ मंदिर के कपाट खोले गए। इस दौरान भगवान ज्योतेश्वर महादेव का दूध, दही, शहद से अभिषेक करने के बाद विशेष पूजा की गई। ज्योतेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी महिमानंद उनियाल ने बताया कि आदि गुरु शंकराचार्य ने केरल के कालड़ी गांव से आकर अमर कल्प वृक्ष के नीचे पांच साल तक तप किया, यहीं पर उन्हें दिव्य ज्ञान ज्योति के दर्शन हुए थे। उन्होंने लुप्त हो रहे सनातन धर्म की रक्षा की थी। बदरीनाथ धाम में भगवान बदरीनाथ की मूर्ति को नारद कुंड से निकालकर पुन: स्थापित किया था। उन्होंने भारत के चार कोनों में चार पीठ की स्थापना की थी। इसी के नाम से इस पवित्र पीठ का नाम ज्योतिषपीठ पड़ा। यहां दुनिया का सबसे पुराना (2500 पुराना) कल्प वृक्ष है। इसी के नीचे उन्होंने तप किया था। इस दौरान स्वामी मुकुंदानंद गोविंद प्रसाद उनियाल और गणेश आदि उपस्थित रहे।
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