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Chamoli News: बदलते मौसम से बदल रहा स्वभाव, बेचैनी व सुस्ती बढ़ी
Sat, 22 Mar 2025 11:06 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sat, 22 Mar 2025 11:06 PM IST
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गौचर। बदलते मौसम से स्वास्थ्य ही नहीं व्यवहार पर भी असर पड़ रहा है। विशेषज्ञ इसका कारण शीतकाल के बाद हो रही गरमी को मान रहे हैं।
डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बदलते मौसम से सर्केडियन लय विकार पैदा होता है जो हमारे शरीर की दिनचर्या को असंतुलित करता है। इससे सुस्ती और नकारात्मक विचार आने जैसी समस्या होती है। इन दिनों सुस्ती, काम में मन न लगना, बेचैनी, नकारात्मक विचार आना, निराशा व उदासी के लक्षण वाले मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्केडियन लय विकार (24 घंटे का वह चक्र जो हमें बताता है कि कब सोना है और कब जागना है) के कारण यह मौसमी अवसाद पैदा होता है। वसंत ऋतु में जहां अधिक मात्रा में सूर्य की रोशनी व्यवहार को बेहतर बनाने वाले हार्मोन सेरोटोनिन को सक्रिय करती है। वहीं नींद के लिए जरूरी मेलाटोनिन हार्मोन भी अधिक सक्रिय रहता है। सर्दी और गर्मी के मिलेजुले इस मौसम में इन दोनों हार्मोनस की परस्पर क्रिया बढ़ने से शरीर में तनाव बढ़ता है जिससे थकान व अवसाद पैदा होता है।
शरीर अचानक इस गर्मी के लिए तैयार नहीं रहता है जिससे बेचैनी, उदासी और चिढ़चिढ़ापन बढ़ जाता है। पीएचसी गौचर के चिकित्साधिकारी डाॅ. रजत कुमार का कहना है कि मौसमी अवसाद से बचाव के लिए संतुलित आहार लें, व्यायाम करें और दिनचर्या नियमित बनाए रखें। साथ ही अच्छी नींद भी जरूरी है और योग कर तनाव से मुक्त रहें। संवाद
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डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बदलते मौसम से सर्केडियन लय विकार पैदा होता है जो हमारे शरीर की दिनचर्या को असंतुलित करता है। इससे सुस्ती और नकारात्मक विचार आने जैसी समस्या होती है। इन दिनों सुस्ती, काम में मन न लगना, बेचैनी, नकारात्मक विचार आना, निराशा व उदासी के लक्षण वाले मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्केडियन लय विकार (24 घंटे का वह चक्र जो हमें बताता है कि कब सोना है और कब जागना है) के कारण यह मौसमी अवसाद पैदा होता है। वसंत ऋतु में जहां अधिक मात्रा में सूर्य की रोशनी व्यवहार को बेहतर बनाने वाले हार्मोन सेरोटोनिन को सक्रिय करती है। वहीं नींद के लिए जरूरी मेलाटोनिन हार्मोन भी अधिक सक्रिय रहता है। सर्दी और गर्मी के मिलेजुले इस मौसम में इन दोनों हार्मोनस की परस्पर क्रिया बढ़ने से शरीर में तनाव बढ़ता है जिससे थकान व अवसाद पैदा होता है।
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शरीर अचानक इस गर्मी के लिए तैयार नहीं रहता है जिससे बेचैनी, उदासी और चिढ़चिढ़ापन बढ़ जाता है। पीएचसी गौचर के चिकित्साधिकारी डाॅ. रजत कुमार का कहना है कि मौसमी अवसाद से बचाव के लिए संतुलित आहार लें, व्यायाम करें और दिनचर्या नियमित बनाए रखें। साथ ही अच्छी नींद भी जरूरी है और योग कर तनाव से मुक्त रहें। संवाद
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