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टेंडर हुए दो साल बीत गए, अभी पेयजल योजना का कोई पता नहीं

Sat, 05 Nov 2022 12:45 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 05 Nov 2022 12:45 AM IST
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Tendered two years ago, drinking water scheme is not known
जोशीमठ नगर के लोग लंबे समय से पेयजल संकट से परेशान हैं मगर विभागीय लापरवाही को देखते हुए यह संकट जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा है। स्थिति यह है कि जल निगम की ओर से दो साल पहले जोशीमठ पेयजल योजना के टेंडर तो कर दिए गए लेकिन अभी तक योजना का कोई पता नहीं है। चार करोड़ की इस योजना पर अभी पाइप खरीद का काम भी शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में सरकारी योजनाओं के निर्माण की धीमी गति का खामियाजा जनता को पानी ढोकर लाकर झेलना पड़ रहा है।
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जोशीमठ क्षेत्र में जल विद्युत परियोजना का काम कर रही एनटीपीसी ने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर जोशीमठ पेयजल योजना का निर्माण करवाने पर अपनी सहमति दी। इसके लिए वर्ष 2020 में एनटीपीसी ने जल निगम को चार करोड़ की धनराशि भी दी। धनराशि मिलते ही जल निगम ने उसी दौरान तुगासी पेयजल स्रोत से करीब 25 किलोमीटर लंबी पेयजल योजना का प्रस्ताव तैयार किया और टेंडर प्रक्रिया शुरू की लेकिन अभी तक पेयजल योजना का काम शुरू नहीं हो पाया है।
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जोशीमठ नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार का कहना है कि कई बार जल निगम के अधिकारियों से बात की गई लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों को दूरस्थ क्षेत्रों से पानी ढोकर लाना पड़ता है। यात्राकाल में पेयजल की गंभीर समस्या से जूझना पड़ता है। उन्होंने जल निगम के अधिकारियों से शीघ्र पेयजल योजना पर काम शुरू करने का आग्रह किया है।
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चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ाव जोशीमठ की आबादी करीब 26 हजार है। नगर क्षेत्र में मौजूदा समय में पांच एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की आवश्यकता है जबकि पानी की सप्लाई मात्र तीन लीटर हो रही है जिससे कई मोहल्लों में दो-दो दिन तक पानी नहीं आता है। जोशीमठ में जल विद्युत परियोजना के कार्यालयों के साथ ही बड़ी मात्रा में होटल हैं। यात्राकाल में तीर्थयात्रियों के लिए भी पेयजल की व्यवस्था करना मुश्किल बना रहता है। चारधाम यात्रा के दौरान जल निगम की ओर से टैंकरों के जरिये पेयजल की सप्लाई की जाती है।

जोशीमठ पेयजल योजना के लिए वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब ठेकेदार की ओर से पाइपों की खरीद की जा रही है। एनटीपीसी की ओर से चार करोड़ रुपये दिए गए हैं जिनमें से करीब 25 लाख रुपये वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया पर खर्च हो गए हैं। ठेकेदार को शीघ्र पेयजल योजना पर कार्य शुरू करने के लिए कहा गया है। - वीके जैन, ईई, जल निगम, गोपेश्वर, चमोली।
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