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जोशीमठ में भू-धंसाव का सर्वेक्षण शुरू
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भू सर्वेक्षण के लिए जोशीमठ पहुंची भू वैज्ञानिकों की टीम।
- फोटो : GOPESHWAR
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जोशीमठ क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव का सर्वेक्षण बुधवार से शुरू हो गया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्याधिकारी की अध्यक्षता में पहुंची वैज्ञानिकों की टीम ने पहले दिन विष्णुप्रयाग से मारवाड़ी मोटर पुल तक निरीक्षण किया। वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर क्षेत्र में भू-धंसाव रोकने के लिए शासन की ओर से कार्रवाई शुरू की जाएगी।
जोशीमठ क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव को लेकर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव डा. रंजीव कुमार सिन्हा के आदेश पर भू-वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन की टीम ने यह सर्वेक्षण कार्य शुरू किया है। पहले दिन टीम ने विष्णुप्रयाग से मारवाड़ी मोटर पुल तक का निरीक्षण किया। नगर पालिका जोशीमठ के अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार ने बताया कि टीम इसके बाद सुनील वार्ड में निरीक्षण करेगी। सर्वेक्षण पूरा होने तक टीम यहीं रहेगी। सर्वेक्षण करने पहुंची टीम में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी निदेशक डा. पीयूष रौतेला, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग जीएसआई देहरादून के निदेशक मनोज कायस्था, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिक प्रो. सांतनु सरकार, आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक प्रो. बीके माहेश्वरी, वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डा. स्वप्लामिता चौधरी, उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के भू-वैज्ञानिक सुशील खंडूड़ी शामिल है।
निर्माण किए पर पानी की निकासी नहीं
टीम में आपदा प्रबंधन के अपर मुख्य कार्याधिकारी पीयूष रौतेला ने बताया कि विष्णुप्रयाग से मारवाड़ी तक निरीक्षण के दौरान देखा गया कि यहां अलकनंदा नदी से काफी कटाव हो रहा है। नदी का जल स्तर काफी बढ़ा है और यहां से भी काफी भू-धंसाव हो रहा है। शहर में कई निर्माण कार्य हो रहे हैं लेकिन पानी की निकासी सही तरीके से नहीं हो पा रही है। नगर में कई जगहों पर दरारें हैं। इसके अलावा एटीनाला सहित अन्य जगह पर भी गए। अब औली और सुनील जा रहे हैं। तीन दिनों में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी।
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अपर मुख्य सचिव ने भी जताई थी चिंता
अपर मुख्य सचिव एवं अवस्थापना विकास आयुक्त आनंदवर्द्न ने बीते चार जुलाई को जोशीमठ क्षेत्र का निरीक्षण किया था। नगर पालिका अध्यक्ष की ओर से उन्हें भू-धंसाव के संबंध में ज्ञापन दिया गया जिसके बाद उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन को पत्र लिखकर कहा था। कहा था कि उन्होंने खुद भी विभिन्न जगहों का अवलोकन किया है। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं किया गया तो भविष्य में किसी गंभीर आपदा से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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जोशीमठ क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव को लेकर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव डा. रंजीव कुमार सिन्हा के आदेश पर भू-वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन की टीम ने यह सर्वेक्षण कार्य शुरू किया है। पहले दिन टीम ने विष्णुप्रयाग से मारवाड़ी मोटर पुल तक का निरीक्षण किया। नगर पालिका जोशीमठ के अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार ने बताया कि टीम इसके बाद सुनील वार्ड में निरीक्षण करेगी। सर्वेक्षण पूरा होने तक टीम यहीं रहेगी। सर्वेक्षण करने पहुंची टीम में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी निदेशक डा. पीयूष रौतेला, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग जीएसआई देहरादून के निदेशक मनोज कायस्था, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिक प्रो. सांतनु सरकार, आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक प्रो. बीके माहेश्वरी, वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डा. स्वप्लामिता चौधरी, उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के भू-वैज्ञानिक सुशील खंडूड़ी शामिल है।
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निर्माण किए पर पानी की निकासी नहीं
टीम में आपदा प्रबंधन के अपर मुख्य कार्याधिकारी पीयूष रौतेला ने बताया कि विष्णुप्रयाग से मारवाड़ी तक निरीक्षण के दौरान देखा गया कि यहां अलकनंदा नदी से काफी कटाव हो रहा है। नदी का जल स्तर काफी बढ़ा है और यहां से भी काफी भू-धंसाव हो रहा है। शहर में कई निर्माण कार्य हो रहे हैं लेकिन पानी की निकासी सही तरीके से नहीं हो पा रही है। नगर में कई जगहों पर दरारें हैं। इसके अलावा एटीनाला सहित अन्य जगह पर भी गए। अब औली और सुनील जा रहे हैं। तीन दिनों में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी।
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अपर मुख्य सचिव ने भी जताई थी चिंता
अपर मुख्य सचिव एवं अवस्थापना विकास आयुक्त आनंदवर्द्न ने बीते चार जुलाई को जोशीमठ क्षेत्र का निरीक्षण किया था। नगर पालिका अध्यक्ष की ओर से उन्हें भू-धंसाव के संबंध में ज्ञापन दिया गया जिसके बाद उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन को पत्र लिखकर कहा था। कहा था कि उन्होंने खुद भी विभिन्न जगहों का अवलोकन किया है। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं किया गया तो भविष्य में किसी गंभीर आपदा से इनकार नहीं किया जा सकता है।