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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम प्रसाद बहुगुणा की जन्म शताब्दी पर विशेष
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व्. राम प्रसाद बहुगुणा।
- फोटो : GOPESHWAR
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प्रखर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और मिशनरी पत्रकारिता के स्तंभ राम प्रसाद बहुगुणा की आज जन्म शताब्दी वर्षगांठ है। देश की आजादी के लिए प्राणों को न्योछावर करने वाले बहुगुणा ब्रिटिश साम्राज्य के लिए चुनौती बन गए थे। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने जेल यात्रा भी की।
वर्ष 1920 में नंदप्रयाग निवासी गोपाल दत्त बहुगुणा के घर जन्मे राम प्रसाद बहुगुणा ने वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने जेल यात्रा की और देश आजादी की लड़ाई में भाग लिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रेरित बहुगुणा वर्ष 1938 में स्कूली पढ़ाई छोड़कर आजादी की जंग में कूद पड़े थे। आजादी के बाद में वे पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गए। गढ़वाल का पहला साप्ताहिक अखबार देवभूमि का प्रकाशन नंदप्रयाग से कर उन्होंने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया।
...तब घोड़े के बजाय पैदल चलते थे अंग्रेज अधिकारी
वर्ष 1947 में भारत की आजादी तक नंदप्रयाग ब्रिटिश गढ़वाल का ही एक भाग था। नंदप्रयाग के बहुगुणा समुदाय लोगों को अपने हकों के लिए एकजुट होने और समाज में फैली कुरीतियों के लिए हमेशा संघर्षरत रहते थे। ऐसा कहा जाता था कि अंग्रेज अधिकारियों पर यहां के बहुगुणा समुदाय का इतना खौफ था कि वे नगर के बाहर ही घोड़े से उतर कर पैदल जाते थे। नगर पंचायत अध्यक्ष डा. हिमानी वैष्णव और बहुगुणा के बेटे अधिवक्ता समीर बहुगुणा ने बताया कि 20 दिसंबर को मुख्य बाजार स्थित बहुगुणा पार्क में उनके चित्र पर माल्यार्पण के बाद नगर पंचायत सभागार में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इस दौरान पेंटिंग प्रतियोगिता भी होगी।
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वर्ष 1920 में नंदप्रयाग निवासी गोपाल दत्त बहुगुणा के घर जन्मे राम प्रसाद बहुगुणा ने वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने जेल यात्रा की और देश आजादी की लड़ाई में भाग लिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रेरित बहुगुणा वर्ष 1938 में स्कूली पढ़ाई छोड़कर आजादी की जंग में कूद पड़े थे। आजादी के बाद में वे पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गए। गढ़वाल का पहला साप्ताहिक अखबार देवभूमि का प्रकाशन नंदप्रयाग से कर उन्होंने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया।
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...तब घोड़े के बजाय पैदल चलते थे अंग्रेज अधिकारी
वर्ष 1947 में भारत की आजादी तक नंदप्रयाग ब्रिटिश गढ़वाल का ही एक भाग था। नंदप्रयाग के बहुगुणा समुदाय लोगों को अपने हकों के लिए एकजुट होने और समाज में फैली कुरीतियों के लिए हमेशा संघर्षरत रहते थे। ऐसा कहा जाता था कि अंग्रेज अधिकारियों पर यहां के बहुगुणा समुदाय का इतना खौफ था कि वे नगर के बाहर ही घोड़े से उतर कर पैदल जाते थे। नगर पंचायत अध्यक्ष डा. हिमानी वैष्णव और बहुगुणा के बेटे अधिवक्ता समीर बहुगुणा ने बताया कि 20 दिसंबर को मुख्य बाजार स्थित बहुगुणा पार्क में उनके चित्र पर माल्यार्पण के बाद नगर पंचायत सभागार में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इस दौरान पेंटिंग प्रतियोगिता भी होगी।
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