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Chamoli News: सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर को पर्यटन मानचित्र में मिला स्थान
Thu, 28 May 2026 07:30 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Thu, 28 May 2026 07:30 PM IST
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मंदिर समिति व स्थानीय लोग लंबे समय से कर रहे थे मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नंदानगर। लंबे संघर्ष और वर्षों की मांग के बाद उत्तराखंड सरकार ने मां नंदा देवी के सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर को पर्यटन मानचित्र में स्थान दे दिया है। सरकार के इस निर्णय से क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है।
नंदानगर विकासखंड स्थित सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर को बड़ी जात और नंदा राजजात का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मंदिर को पर्यटन मानचित्र में शामिल कराने को लेकर पिछले कई दशकों से क्षेत्रीय जनता, मंदिर समितियां और बड़ी जात आयोजन समिति लगातार प्रयासरत थीं। बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल (सेनि) हरेंद्र सिंह रावत और मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर रौतेला ने बताया कि सिद्धपीठ कुरुड़ को पर्यटन मानचित्र पर स्थान देने के लिए सरकार की स्वीकृति मिल गई है। सरकार की स्वीकृति के बाद अब बड़ी जात और नंदा राजजात के आयोजन को लेकर सरकार और मंदिर समितियों के बीच सकारात्मक पहल को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
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मंदिर समिति व स्थानीय लोग लंबे समय से कर रहे थे मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नंदानगर। लंबे संघर्ष और वर्षों की मांग के बाद उत्तराखंड सरकार ने मां नंदा देवी के सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर को पर्यटन मानचित्र में स्थान दे दिया है। सरकार के इस निर्णय से क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है।
नंदानगर विकासखंड स्थित सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर को बड़ी जात और नंदा राजजात का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मंदिर को पर्यटन मानचित्र में शामिल कराने को लेकर पिछले कई दशकों से क्षेत्रीय जनता, मंदिर समितियां और बड़ी जात आयोजन समिति लगातार प्रयासरत थीं। बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल (सेनि) हरेंद्र सिंह रावत और मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर रौतेला ने बताया कि सिद्धपीठ कुरुड़ को पर्यटन मानचित्र पर स्थान देने के लिए सरकार की स्वीकृति मिल गई है। सरकार की स्वीकृति के बाद अब बड़ी जात और नंदा राजजात के आयोजन को लेकर सरकार और मंदिर समितियों के बीच सकारात्मक पहल को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
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