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बिच्छू घास से बनाएंगे मफलर
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली।
Updated Tue, 22 Nov 2016 09:30 PM IST
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जिला उद्योग विभाग की योजना धरातल पर उतरी तो चमोली जिला बिच्छू घास से तैयार होने वाले कपड़ों में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकेगा। विभाग मिनी उद्योग केंद्र कालेश्वर में सामान्य सुविधा केंद्र विकसित कर यहां प्रशिक्षितों से हस्तशिल्प के उत्पाद तैयार करवाएगा। योजना का प्रस्ताव केंद्र और राज्य सरकार को भेजा गया है। योजना के तहत मफलर और अन्य कपड़े यहां तैयार किए जाएंगे।
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उद्योग विभाग द्वारा कालेश्वर में नब्बे के दशक में मिनी उद्योग केंद्र की स्थापना की गई थी। यहां विकसित किए गए 66 प्लाटों में जब बीस साल तक उद्योग नहीं लगे, तो विभाग ने प्लाट आवंटन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। पहले चरण में दो साल पूर्व विभाग ने 30 प्लाट निरस्त किए तो यहां पांच उद्यमियों ने उद्योग स्थापित कर दिए।
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अन्य 10 औद्योगिक इकाइयों का निर्माण कार्य चल रहा है। विभाग भी अब यहां एक सामान्य सुविधा केंद्र बनाने जा रहा है। उद्योग विभाग के महाप्रबंधक डा. एमएस सजवाण ने बताया कि भवन निर्माण के लिए केंद्र सरकार से 10 लाख की राशि मिलेगी, जबकि करीब 40 लाख की मशीनें राज्य सरकार की मदद से लगाई जाएंगी।
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इस केंद्र में जिले भर के प्रशिक्षित आकर अपने उत्पाद तैयार कर उसे बाजार में बेच सकेंगे। डा. सजवाण ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान मंगरोली गांव में बिच्छू घास से ग्रामीणों ने मफलर और अन्य कपड़े के उत्पाद तैयार किए, जिनकी बाजार में डिमांड अच्छी रही। सामान्य सुविधा केंद्र में बिच्छू घास से बनने वाले उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ कताई, बुनाई और लकड़ी से बनने वाले हस्तशिल्प के उत्पाद तैयार करने की योजना है।
ऐसे कर सकेंगे सुविधा केंद्र में काम
जिला उद्योग विभाग सुविधा केंद्र में मशीनों की व्यवस्था करेगा। इन मशीनों में एक बार में करीब 20 प्रशिक्षित अपने उत्पाद तैयार कर पाएंगे, इसके लिए प्रशिक्षितों को मामूली शुल्क विभाग को जमा करना होगा। विभागीय अधिकारियों के मुुताबिक यह योजना उन गरीब प्रशिक्षितों के लिए हैं, जो मशीनें नहीं खरीद सकते हैं या उत्पाद केंद्र नहीं खोल सकते हैं।
पिछले एक साल में विभाग सुविधा केंद्र में काम करने के लिए 150 युवक, युवतियों और ग्रामीणों को प्रशिक्षित कर चुका है।
दवा में भी इस्तेमाल हो रही है कंडाली
आमतौर पर कंडाली के नाम से प्रचलित बिच्छू घास का वानस्पतिक नाम अर्टिका डायोक है। राजकीय महाविद्यालय कर्णप्रयाग के प्रवक्ता डा. सत्यराज अहमद और डा. वीपी भट्ट का कहना है कि कंडाली 2200 फीट की ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। कंडाली में अर्टिकन नाम का पदार्थ पाया जाता है, जो पेट और हृदय रोगों की बीमारी की दवाओं को तैयार करने में भी काम आता है।