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Chamoli News: नहीं बनी सड़क, गंतव्य तक जाने के लिए चलते हैं 12 किमी पैदल
Tue, 30 Jul 2024 06:34 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Tue, 30 Jul 2024 06:34 PM IST
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सितेल-लेटाला-प्राणमति सड़क का निर्माण छह साल बाद भी शुरू नहीं हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
नंदानगर/गोपेश्वर। नंदानगर ब्लॉक के सुदूरवर्ती गांवों को यातायात से जोड़ने के लिए वर्ष 2018 में स्वीकृत 12 किलोमीटर सितेल-लेटाला-प्राणमति सड़क का निर्माण छह साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। सड़क न बनने से ग्रामीण आज भी गंतव्य तक जाने के लिए लगभग 12 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हैं।
वर्ष 2018 में शासन से सितेल-लेटाला-प्राणमति सड़क निर्माण को हरी झंडी मिली थी। इससे ग्राम पंचायत सितेल, लेटाला, प्राणमती, डिकोट, सरमा, बडकुना सहित क्षेत्र के अन्य छोटे गांव यातायात सुविधा से जुड़ जाते। क्षेत्र पंचायत सदस्य कंचन सिंह नेगी, कनोल की प्रधान सरस्वती देवी, सरपंच बलवंत सिंह आदि ने कहा कि सितेल गांव के पास सड़क तक पहुंचने के लिए प्राणमति से करीब आठ किमी तो बडगुना गांव से करीब 12 किमी पैदल चलना पड़ता है। बीमार व्यक्ति को कुर्सी के सहारे कंधे पर ढोकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। बरसात में गदेरे में पानी बढ़ने और सर्दियों में बर्फबारी होने से क्षेत्र में आवाजाही मुश्किल हो जाती है। इधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता नवीन लाल वर्मा का कहना है कि सड़क निर्माण की सभी पत्रावलियां वन विभाग को भेजी गई हैं। वन भूमि की स्वीकृति के बाद पत्रावलियों को राज्य व केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। वहीं बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दूबे का कहना है कि वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नंदानगर/गोपेश्वर। नंदानगर ब्लॉक के सुदूरवर्ती गांवों को यातायात से जोड़ने के लिए वर्ष 2018 में स्वीकृत 12 किलोमीटर सितेल-लेटाला-प्राणमति सड़क का निर्माण छह साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। सड़क न बनने से ग्रामीण आज भी गंतव्य तक जाने के लिए लगभग 12 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हैं।
वर्ष 2018 में शासन से सितेल-लेटाला-प्राणमति सड़क निर्माण को हरी झंडी मिली थी। इससे ग्राम पंचायत सितेल, लेटाला, प्राणमती, डिकोट, सरमा, बडकुना सहित क्षेत्र के अन्य छोटे गांव यातायात सुविधा से जुड़ जाते। क्षेत्र पंचायत सदस्य कंचन सिंह नेगी, कनोल की प्रधान सरस्वती देवी, सरपंच बलवंत सिंह आदि ने कहा कि सितेल गांव के पास सड़क तक पहुंचने के लिए प्राणमति से करीब आठ किमी तो बडगुना गांव से करीब 12 किमी पैदल चलना पड़ता है। बीमार व्यक्ति को कुर्सी के सहारे कंधे पर ढोकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। बरसात में गदेरे में पानी बढ़ने और सर्दियों में बर्फबारी होने से क्षेत्र में आवाजाही मुश्किल हो जाती है। इधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता नवीन लाल वर्मा का कहना है कि सड़क निर्माण की सभी पत्रावलियां वन विभाग को भेजी गई हैं। वन भूमि की स्वीकृति के बाद पत्रावलियों को राज्य व केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। वहीं बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दूबे का कहना है कि वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी।
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