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पुनर्वास राशि मिले तो बनाएं घर
ब्यूरो/ अमर उजाला चमोली
Updated Mon, 01 Feb 2016 09:43 PM IST
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फोआपदा के ढाई साल बाद भी चमोली जिले के चमेली गांव के प्रभावित आज भी पुनर्वास राशि के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। गांव के 158 परिवारों में से 75 परिवारों को घर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने साढ़े सात लाख रुपये मुआवजा दिया लेकिन गांव के 83 परिवार आज भी पुनर्वास राशि के लिए भटक रहे हैं। मौजूदा समय में ये सभी परिवार गांव में ही अपने क्षतिग्रस्त मकानों में रहने को मजबूर हैं।
वर्ष 2013 को 15-16 जून की रात को हुई अतिवृष्टि से चमेली गांव में कई मकान भू-धंसाव की जद में आ गए थे। जिन 75 परिवारों के मकान पूरी जमींदोज हो गए थे, उन्हें नए जगहों पर मकान बनाने के लिए चार किस्तों में साढ़े सात लाख रुपये दिए गए। ग्रामीणों ने घिंघराण क्षेत्र में नए मकान भी बना लिए, जबकि गांव में रह रहे 83 परिवार अपने क्षतिग्रस्त भवनों में ही रह रहे हैं। इन ग्रामीणों के मकान आंशिक और तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त हैं, इन्हें प्रशासन की ओर से मात्र साढ़े तीन लाख की पुनर्वास राशि दी जा रही है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि साढ़े तीन लाख में भूमि की खरीद और मकान बनाना संभव नहीं है। भोटिया जनजाति विकास समिति के महासचिव धीरेंद्र गरोड़िया का कहना है कि चमेली गांव में कोई भी मकान रहने लायक नहीं है।
केस-एक
चमेली गांव के रघुवीर सिंह कुंवर का पांच कमरों का मकान जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। मकान की बुनियाद में दरारें पड़ी हैं। यदि भूकंप का तेज झटका आता है तो मकान जमींदोज हो जाएगा। बचन सिंह का कहना है कि उन्हें अभी तक मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं मिला है। भू-धंसाव से मकान रहने लायक नहीं हैं, लेकिन मजबूरी में यहां रह रहे हैं। रात को कई बार भूकंप जैसा आभास होता है तो कमरे से बाहर निकल जाते हैं।
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केस-दो
चमेली गांव के रणजीत सिंह टोलिया का मकान गांव के बीच है। उनके मकान पर चारों ओर से दरारें पड़ी हैं, लेकिन सरकारी रिकार्ड में भवन की आंशिक क्षति दर्शाई गई है। रणजीत सिंह का कहना है कि मकान भू-धंसाव से हिला है। बरसात में मकान में रहने से डर लगता है। थोड़ी सी बारिश होने पर भी मकान की छत से पानी टपकना शुरू हो जाता है।
चमेली गांव भू-धंसाव के चलते पुनर्वास की श्रेणी में है। यहां के सभी परिवारों का पुनर्वास किया जाना है, जिन परिवारों के मकान आंशिक और तीक्ष्ण क्षति में हैं, उन्हें भी मकान बनाने के लिए राहत राशि दी जा रही है, लेकिन ग्रामीण अपने गांव को छोड़ने को राजी नहीं हैं, जिससे गांव का पूर्ण पुनर्वास नहीं हो पाया है। - नंद किशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली।
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वर्ष 2013 को 15-16 जून की रात को हुई अतिवृष्टि से चमेली गांव में कई मकान भू-धंसाव की जद में आ गए थे। जिन 75 परिवारों के मकान पूरी जमींदोज हो गए थे, उन्हें नए जगहों पर मकान बनाने के लिए चार किस्तों में साढ़े सात लाख रुपये दिए गए। ग्रामीणों ने घिंघराण क्षेत्र में नए मकान भी बना लिए, जबकि गांव में रह रहे 83 परिवार अपने क्षतिग्रस्त भवनों में ही रह रहे हैं। इन ग्रामीणों के मकान आंशिक और तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त हैं, इन्हें प्रशासन की ओर से मात्र साढ़े तीन लाख की पुनर्वास राशि दी जा रही है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि साढ़े तीन लाख में भूमि की खरीद और मकान बनाना संभव नहीं है। भोटिया जनजाति विकास समिति के महासचिव धीरेंद्र गरोड़िया का कहना है कि चमेली गांव में कोई भी मकान रहने लायक नहीं है।
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केस-एक
चमेली गांव के रघुवीर सिंह कुंवर का पांच कमरों का मकान जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। मकान की बुनियाद में दरारें पड़ी हैं। यदि भूकंप का तेज झटका आता है तो मकान जमींदोज हो जाएगा। बचन सिंह का कहना है कि उन्हें अभी तक मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं मिला है। भू-धंसाव से मकान रहने लायक नहीं हैं, लेकिन मजबूरी में यहां रह रहे हैं। रात को कई बार भूकंप जैसा आभास होता है तो कमरे से बाहर निकल जाते हैं।
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केस-दो
चमेली गांव के रणजीत सिंह टोलिया का मकान गांव के बीच है। उनके मकान पर चारों ओर से दरारें पड़ी हैं, लेकिन सरकारी रिकार्ड में भवन की आंशिक क्षति दर्शाई गई है। रणजीत सिंह का कहना है कि मकान भू-धंसाव से हिला है। बरसात में मकान में रहने से डर लगता है। थोड़ी सी बारिश होने पर भी मकान की छत से पानी टपकना शुरू हो जाता है।
चमेली गांव भू-धंसाव के चलते पुनर्वास की श्रेणी में है। यहां के सभी परिवारों का पुनर्वास किया जाना है, जिन परिवारों के मकान आंशिक और तीक्ष्ण क्षति में हैं, उन्हें भी मकान बनाने के लिए राहत राशि दी जा रही है, लेकिन ग्रामीण अपने गांव को छोड़ने को राजी नहीं हैं, जिससे गांव का पूर्ण पुनर्वास नहीं हो पाया है। - नंद किशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली।