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Chamoli News: राजेश्वरी और विवेक होंगे फ्यूंलानारायण मंदिर के पुजारी
Thu, 17 Jul 2025 06:45 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Thu, 17 Jul 2025 06:45 PM IST
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फोटो--
आज खुलेंगे मंदिर के कपाट, देश का एकमात्र विष्णु मंदिर जहां महिला भी होती है पुजारी
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। फ्यूंलानारायण मंदिर के कपाट शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने को लेकर स्थानीय लोगों ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार मंदिर में पुजारी की जिम्मेदारी विवेक रावत को और भगवान के शृंगार की जिम्मेदारी राजेश्वरी देवी को सौंपी गई है। यह देश का एकमात्र विष्णु भगवान का मंदिर है जहां महिला पुजारी हैं।
10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित भगवान फ्यूंलानारायण मंदिर के कपाट शुक्रवार को विधिविधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। नंदा अष्टमी तक मंदिर के कपाट खुले रहते हैं। भरकी गांव निवासी गुडवीर सिंह चौहान ने बताया कि इस साल मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी विवेक रावत और महिला पुजारी राजेश्वरी देवी को सौंपी गई है। कुंवर सिंह नेगी, दर्शन सिंह चौहान, मान सिंह, नंदा सिंह नेगी, राजेंद्र पंवार, योगंबर सिंह ने बताया कि कपाट खुलने के समय भेटा, भरकी, पिलखी, ग्वाणा, अरोसी सहित अन्य गांव के लोग मौजूद रहेंगे। संवाद
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आज खुलेंगे मंदिर के कपाट, देश का एकमात्र विष्णु मंदिर जहां महिला भी होती है पुजारी
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। फ्यूंलानारायण मंदिर के कपाट शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने को लेकर स्थानीय लोगों ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार मंदिर में पुजारी की जिम्मेदारी विवेक रावत को और भगवान के शृंगार की जिम्मेदारी राजेश्वरी देवी को सौंपी गई है। यह देश का एकमात्र विष्णु भगवान का मंदिर है जहां महिला पुजारी हैं।
10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित भगवान फ्यूंलानारायण मंदिर के कपाट शुक्रवार को विधिविधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। नंदा अष्टमी तक मंदिर के कपाट खुले रहते हैं। भरकी गांव निवासी गुडवीर सिंह चौहान ने बताया कि इस साल मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी विवेक रावत और महिला पुजारी राजेश्वरी देवी को सौंपी गई है। कुंवर सिंह नेगी, दर्शन सिंह चौहान, मान सिंह, नंदा सिंह नेगी, राजेंद्र पंवार, योगंबर सिंह ने बताया कि कपाट खुलने के समय भेटा, भरकी, पिलखी, ग्वाणा, अरोसी सहित अन्य गांव के लोग मौजूद रहेंगे। संवाद
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