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पिंडर व कैल नदी पर बन रहे बांध का विरोध शुरू

Thu, 11 Feb 2021 09:40 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 11 Feb 2021 09:40 PM IST
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Protest against dam being built on Pinder and Kail river
ऋषि गंगा में आई जल प्रलय व तपोवन जल विद्युत परियोजना से हुए भारी जनहानि से डरे ग्रामीणों ने पिंडर व कैल नदी पर बनने वाली विद्युत परियोजना का विरोध शुरू कर दिया है। देवाल ब्लॉक के पिंडर नदी में सतलुज की ओर से 172 मेगावाट की परियोजना बनाई जा रही है, वहीं पिंडर नदी में अन्य जल विद्युत परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं।
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हिमाचल प्रदेश व केंद्र सरकार का संयुक्त उपक्रम सतलुज की ओर से पिंडर नदी में देवसारी डैम बनाया जा रहा है। इसके बनने से सोड़िग गांव का विस्थापन होगा। बांध से पिंडर के देवाल, थराली व नारायणबगड़ ब्लॉक के 465 परिवार प्रभावित होंगे। वहीं देवाल- कैल संगम भी डूब जाएगा। सतलुज द्वारा बनाए जा रहे देवसारी डैम से देवाल से नारायणबगड़ तक सार्वजनिक स्थल, घाट व पर्यावरण पर इसका प्रभाव पड़ेगा। पूर्व प्रमुख उर्मिला बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य आशा धपोला, देवी जोशी, राजेंद्र दानू, कांग्रेस के अध्यक्ष इंद्र राणा, माकपा के प्रदेश मंत्री राजेंद्र नेगी, मदन मिश्रा, भूपाल रावत वन पंचायत परामर्शदात्री समिति के ब्लॉक अध्यक्ष व कई पंचायत प्रतिनिधियों व स्थानीय लोगों ने सरकार से पिंडर नदी में बन रहे देवसारी डैम को स्थगित करने की मांग की।
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महिलाओं ने की देवसारी डैम स्थगित करने की मांग
देवाल। महिला कांग्रेस की बैठक में जोशीमठ के तपोवन व रैणी क्षेत्र में आई भीषण आपदा में हताहत हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। महिला कांग्रेस ने पहाड़ों में हो रही इस तरह की घटना के पीछे प्रकृति के साथ छेड़छाड़ बताया। उन्होंने सरकार से पिंडर नदी पर बन रहे 172 मेगावाट के देवसारी डैम को स्थगित करने की मांग की। प्रदेश सचिव उर्मिला बिष्ट ने कहा कि वर्ष 2013 और जोशीमठ की आपदा ने बता दिया कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ घातक है। तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े बांध बनाना खतरनाक है। सरकार को बड़े बांधों पर पुनर्विचार करना चाहिए। पिंडर के लोग एक दशक से देवसारी डैम का विरोध कर रहे हैं। इस मौके पर पुष्पा, उमा, गीता, हेमा, पार्वती, संगीता, खगोती, राजुली, अनिता, रेखा और सुनीता मौजूद थे। संवाद
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