बदरीनाथ: श्राद्ध पक्ष में ब्रह्मकपाल पहुंचे विदेशी श्रद्धालु, विधि-विधान से कराया पितरों का तर्पण और पिंडदान
श्राद्ध पक्ष में बदरीनाथ का ब्रह्मकपाल तीर्थ देश ही नहीं, विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। रूस से पहुंचे आठ श्रद्धालुओं के दल ने यहां धार्मिक परंपराओं को समझा और विधि-विधान के साथ पितरों का तर्पण व पिंडदान कराया।
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श्राद्ध पक्ष में पितरों के पिंडदान और तर्पण के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। इस वर्ष पूर्व की अपेक्षा अधिक संख्या में श्रद्धालु ब्रह्मकपाल तीर्थ में पिंडदान करा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। विदेशी श्रद्धालु भी पूरे विधि-विधान से पितरों का तर्पण और पिंडदान करा रहे हैं। साथ ही ब्रह्मकपाल तीर्थ के धार्मिक महत्व की जानकारी ले रहे हैं।
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तीर्थ पुरोहित सुरेश हटवाल, संजय हटवाल, हरीश सती और मदन कोठियाल ने बताया कि मंगलवार को रूस से आठ श्रद्धालुओं का दल पिंडदान के लिए ब्रह्मकपाल पहुंचा।
बदरीनाथ में यहां पिंडदान व तर्पण करने का है विशेष महत्व, सात पीढ़ियों का होता है उद्धार
बदरीनाथ धाम में स्थित ब्रह्मकपाल में पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां पिंडदान व तर्पण करने से सात पीढि़यों का उद्धार हो जाता है। मंगलवार (आज) से 15 दिनों तक यहां पिंडदान व तर्पण करने वालों का तांता लगा रहेगा।
बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल को कपालमोचन तीर्थ भी कहा जाता है। मान्यता है कि जब भगवान ब्रह्मा का पांचवां सिर विचलित हो गया था तब भगवान शिव ने उसे काट दिया था जो बदरीनाथ के पास अलकनंदा नदी के किनारे गिरा। यह आज भी यहां पर शिला के रूप में अवस्थित है। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से लेकर बंद होने तक यहां देश से लोग पितरों का पिंडदान व तर्पण करने आते हैं लेकिन श्राद्ध पक्ष में यहां भीड़ लग जाती है।
ब्रह्मकपाल को लेकर मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति ने कभी भी पितरों का कहीं भी पिंडदान या तर्पण नहीं किया तो वह यहां आकर कर सकता है। यहां पिंडदान व तर्पण करने के बाद अन्यत्र कहीं भी पिंडदान या तर्पण नहीं करना चाहिए क्योंकि यह पिंडदान करने का श्रेष्ठ स्थान माना गया है। ब्रह्मकपाल के तीर्थ पुरोहित हरीश सती ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में यहां पिंडदान व तर्पण करने वालों की भीड़ लगी रहती है।