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Chamoli News: जोशीमठ नगर के नीचे विस्फोट कर बनाई गई है एनटीपीसी की सुरंग

Sun, 08 Jan 2023 09:26 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 08 Jan 2023 09:26 PM IST
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NTPC's tunnel is made by blasting under Joshimath city
एनटीपीसी की परियोजना के लिए बनी बाईपास सुरंग जोशीमठ के नीचे से होकर बनी है जिसे विस्फोट कर बनाया गया है। नगर में भू-धंसाव का मुख्य कारण जमीन के अंदर लगातार किए विस्फोट ही हैं। यह बातें जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने कहीं। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी की परियोजना का शुरू से विरोध किया गया तब कंपनी ने घरों का बीमा कराने की बात कही थी लेकिन इस पर कभी काम नहीं हुआ।
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संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती का कहना है कि सरकार और एनटीपीसी लगातार परियोजना की सुरंग को जोशीमठ से दूर बता रही है लेकिन बाईपास सुरंग कहां है यह नहीं बताया जा रहा। कहा कि यह सुरंग जोशीमठ के नीचे से है और इसे लगातार विस्फोट कर बनाया गया है जिससे भू-धंसाव में तीव्रता आई है। इसीलिए नगर की जनता इस तबाही के लिए एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना को जिम्मेदार मानती है। उनका कहना है कि परियोजना जब प्रस्तावित थी तभी उन्होंने वर्ष 2003 में इसी आशंका के चलते तत्कालीन राष्ट्रपति को पत्र लिखा था जिसमें नगर के नीचे से सुरंग बनाने से इसके अस्तित्व पर खतरे की बात कही गई थी। वर्ष 2005 में परियोजना के लिए हुई जनसुनवाई में भी यह मुद्दा उठा। लोगों के भारी विरोध के चलते परियोजना का शिलान्यास जोशीमठ के बजाय देहरादून में किया गया। दो साल तक इसके विरोध में आंदोलन चला। सुरंग बनाने के दौरान वर्ष 2009 में टीबीएम मशीन फंस गई और वहां से 600 लीटर प्रति सेकंड के हिसाब से पानी का रिसाव होने लगा। लोगों ने आंदोलन किया और तत्कालीन केंद्रीय ऊर्जा मंत्री व प्रशासन की मध्यस्ता में एनटीपीसी से समझौता हुआ जिसके तहत एनटीपीसी को जोशीमठ में पेयजल की व्यवस्था करने और घरों का बीमा कराना था लेकिन इस पर कभी काम नहीं हुआ।
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ठोस कार्रवाई होने तक जारी रहेगा आंदोलन
संघर्ष समिति ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती उनका आंदोलन जारी रहेगा। समिति का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के जोशीमठ आने पर पांच बिंदुओं पर वार्ता की पेशकश की थी। सीएम के ओएसडी से भी बात कर ली थी लेकिन सीएम ने कोई घोषणा करने के बजाय देहरादून जाकर बैठक में घोषणा तय करने की बात कही। समिति ने सीएम से एनटीपीसी की परियोजना को बंद करने, हेलंग-मारवाड़ी बाईपास बंद करने, एनटीपीसी से हुए समझौते को लागू करने सहित अन्य मांगें की थीं लेकिन उनको गंभीरता से नहीं लिया गया। संवाद
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