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मेलमिंडा गांव पहुंची जीप तो झूमे लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली।
Updated Sun, 11 Dec 2016 10:33 PM IST
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Happily swaying rural
- फोटो : अमर उजाला
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लंबे समय से विवाद में अटकी सड़क के दो सौ मीटर हिस्से पर मेलमिंडा के ग्रामीणों ने चार दिनों तक श्रमदान किया और रविवार को पूरी सड़क बनाकर मेलमिंडा गांव तक जीप पहुंचा दी। गांव में वाहन पहुंचने पर ग्रामीण खुशी से झूम उठे। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से अब मेलमिंडा और पोखरीगाड़ गांवों की 1200 से अधिक आबादी को दस किमी पैदल दूरी नहीं नापनी होगी।
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देवाल-खेता मोटर मार्ग के रैन गांव से पलबरा-मेलमिंडा के लिए मोटर मार्ग बनाया जा रहा था। मार्ग का मलबा रैन गांव के ऊपर फेंकने पर रैन के ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। विरोध के चलते एक साल से पलबरा गांव के पास 200 मीटर रोड नहीं कटने से मेलमिंडा और पोखरीगाड़ गांवों तक वाहन नहीं जा पा रहे थे, जबकि विवादित हिस्से से आगे पांच किमी सड़क कट चुकी थी।
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सड़क कटने के बावजूद मेलमिंडा के ग्रामीणों को पैदल चलना पड़ रहा था। ऐसे में ग्रामीणों ने विवादित सड़क के 200 मीटर हिस्से पर आठ दिसंबर से श्रमदान करना शुरू किया। करीब 150 ग्रामीणों ने चार दिनों तक सड़क पर काम किया और रविवार को ग्रामीणों ने मेलमिंडा तक जीप पहुंचा दी।
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गांव में वाहन पहुंचने पर ग्रामीण झूम उठे। प्रधान जानकी देवी ने इसे गांव के लिए उपहार बताया तो बुजुर्ग भीम सिंह, गुलाब सिंह, अमरा देवी, खगोती देवी ने कहा कि गांव में वाहन पहुंचे इसे देखने के लिए आठ दशक बीत गए। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को अब जहां स्कूल आने जाने में सुविधा मिलेगी वहीं लोगों को बाजार जाने के लिए 10 किमी की पैदल दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।