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Chamoli News: दुर्गम चट्टानी क्षेत्र में हैं क्षत-विक्षत शव, सड़क तक पहुंचाना चुनौती
Sat, 31 Oct 2026 07:03 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sat, 31 Oct 2026 07:03 PM IST
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फोटो
जवानों को शव सड़क तक लाने में करनी पड़ रही खासी मशक्कत
चट्टानी रास्ता पार घटनास्थल पर तीन से चार घंटे में पहुंच पा रहे जवान
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। हेलिकॉप्टर हादसे में मारे गए पायलट और पांच तीर्थयात्रियों के शवों को सड़क तक पहुंचाना रेस्क्यू टीमों के लिए चुनौती बना हुआ है। शव क्षत-विक्षत हैं और दुर्घटनास्थल दुर्गम चट्टानी क्षेत्र में होने के कारण जवानों को शव सड़क तक लाने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। जवानों को चट्टानी रास्ता पार घटनास्थल पर पहुंचने में ही तीन से चार घंटे लग जा रहे हैं।
बदरीनाथ धाम से तीर्थयात्रियों को लेकर सहस्रधारा हेलिपैड जा रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर शुक्रवार दोपहर हाथी पहाड़ के शीर्ष पर चांई गांव और लामबगड़ के बीच चट्टान से टकराकर खाई में जा गिरा था और पायलट समेत छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटनास्थल तक पहुंच आसान न होने के कारण कुछ समय बाद अंधेरा हो गया और रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा। शनिवार सुबह सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त अभियान शुरू किया। दुर्घटनास्थल सड़क से करीब 12 किलोमीटर दूर है। पांडुकेश्वर से रवाना हुई टीमें तीन से चार घंटे की कठिन चढ़ाई और चट्टानी रास्ता पार कर दोपहर करीब 12 बजे घटनास्थल पर पहुंचीं। इसके बाद शवों को सड़क तक लाने का काम शुरू किया गया। देर शाम तक टीमें रेस्क्यू अभियान में जुटी रहीं। एसडीएम ज्योतिर्मठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि सभी शव क्षत-विक्षत हैं। इस कारण उन्हें सड़क तक पहुंचाने में समय लग रहा है। सभी शवों को सड़क तक लाने के बाद जौलीग्रांट भेजा जाएगा। जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इंसेट-
सबसे पहले मौके पर पहुंची सेना
शुक्रवार को हेलिकॉप्टर हादसे के बाद सेना के जवान सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे थे। उनके मौके पर पहुंचने के बाद ही हेलिकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि हो पाई थी। अन्य रेस्क्यू टीमें भी घटनास्थल के लिए रवाना हुईं लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही अंधेरा हो गया। इस कारण अभियान रोकना पड़ा।
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जवानों को शव सड़क तक लाने में करनी पड़ रही खासी मशक्कत
चट्टानी रास्ता पार घटनास्थल पर तीन से चार घंटे में पहुंच पा रहे जवान
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। हेलिकॉप्टर हादसे में मारे गए पायलट और पांच तीर्थयात्रियों के शवों को सड़क तक पहुंचाना रेस्क्यू टीमों के लिए चुनौती बना हुआ है। शव क्षत-विक्षत हैं और दुर्घटनास्थल दुर्गम चट्टानी क्षेत्र में होने के कारण जवानों को शव सड़क तक लाने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। जवानों को चट्टानी रास्ता पार घटनास्थल पर पहुंचने में ही तीन से चार घंटे लग जा रहे हैं।
बदरीनाथ धाम से तीर्थयात्रियों को लेकर सहस्रधारा हेलिपैड जा रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर शुक्रवार दोपहर हाथी पहाड़ के शीर्ष पर चांई गांव और लामबगड़ के बीच चट्टान से टकराकर खाई में जा गिरा था और पायलट समेत छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटनास्थल तक पहुंच आसान न होने के कारण कुछ समय बाद अंधेरा हो गया और रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा। शनिवार सुबह सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त अभियान शुरू किया। दुर्घटनास्थल सड़क से करीब 12 किलोमीटर दूर है। पांडुकेश्वर से रवाना हुई टीमें तीन से चार घंटे की कठिन चढ़ाई और चट्टानी रास्ता पार कर दोपहर करीब 12 बजे घटनास्थल पर पहुंचीं। इसके बाद शवों को सड़क तक लाने का काम शुरू किया गया। देर शाम तक टीमें रेस्क्यू अभियान में जुटी रहीं। एसडीएम ज्योतिर्मठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि सभी शव क्षत-विक्षत हैं। इस कारण उन्हें सड़क तक पहुंचाने में समय लग रहा है। सभी शवों को सड़क तक लाने के बाद जौलीग्रांट भेजा जाएगा। जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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सबसे पहले मौके पर पहुंची सेना
शुक्रवार को हेलिकॉप्टर हादसे के बाद सेना के जवान सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे थे। उनके मौके पर पहुंचने के बाद ही हेलिकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि हो पाई थी। अन्य रेस्क्यू टीमें भी घटनास्थल के लिए रवाना हुईं लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही अंधेरा हो गया। इस कारण अभियान रोकना पड़ा।
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