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Chamoli News: टीकाकरण के बाद भी नियंत्रित नहीं हो रही लंपी बीमारी
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अभी कई पशु बीमारी से ग्रसित, कई की हो चुकी मौत
चमोली जिले में लंपी बीमारी नियंत्रित नहीं हो पा रही है। पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है उसके बावजूद पशु बड़ी संख्या में बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। कई पशुओं की मौत भी हो चुकी है।
चमोली जिले में निजमुला घाटी के साथ ही अन्य जगहों पर पशु लंपी बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। बुधवार रात को ही ईराणी गांव में विजय सिंह के बैल की मौत हो गई। इससे पहले बलवीर सिंह, देवेंद्र सिंह आदि के बैल और गाय मर चुके हैं। ईराणी के ग्राम प्रधान मोहन नेगी ने बताया कि क्षेत्र के ईराणी, पाणा, पगना, दुर्मी सहित आसपास के गांव में ऐसा कोई परिवार नहीं है जिनके पशु बीमार नहीं हुए हैं। सबसे ज्यादा बैलों की मौत हो रही है। स्थिति यह है कि लोगों को खेती करने के लिए बैल नहीं मिल पा रहे हैं। अधिकांश पशुओं का टीकाकरण हो चुका है उसके बावजूद बीमारी नियंत्रित नहीं हो पा रही है। उन्होंने प्रशासन से क्षेत्र में विशेषज्ञों की टीम भेजने की मांग की। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डाॅ. प्रलयंकरनाथ ने बताया कि जिले में 79 हजार पशुओं का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। अभी तक 1178 मवेशियों में बीमारी की सूचना है और 916 पशु ठीक हो चुके हैं जबकि 23 की मौत की सूचना है। 58 टीमें जिले में गांव-गांव जाकर टीकाकरण कर रही हैं। टीकाकरण के बावजूद बीमारी के लक्षण आ सकते हैं लेकिन मौत की आशंका कम हो जाएगी। पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है कि जिन मवेशियों में लक्षण नहीं हैं उनको संक्रमित पशुओं के संपर्क में न आने दिया जाए।
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चमोली जिले में लंपी बीमारी नियंत्रित नहीं हो पा रही है। पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है उसके बावजूद पशु बड़ी संख्या में बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। कई पशुओं की मौत भी हो चुकी है।
चमोली जिले में निजमुला घाटी के साथ ही अन्य जगहों पर पशु लंपी बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। बुधवार रात को ही ईराणी गांव में विजय सिंह के बैल की मौत हो गई। इससे पहले बलवीर सिंह, देवेंद्र सिंह आदि के बैल और गाय मर चुके हैं। ईराणी के ग्राम प्रधान मोहन नेगी ने बताया कि क्षेत्र के ईराणी, पाणा, पगना, दुर्मी सहित आसपास के गांव में ऐसा कोई परिवार नहीं है जिनके पशु बीमार नहीं हुए हैं। सबसे ज्यादा बैलों की मौत हो रही है। स्थिति यह है कि लोगों को खेती करने के लिए बैल नहीं मिल पा रहे हैं। अधिकांश पशुओं का टीकाकरण हो चुका है उसके बावजूद बीमारी नियंत्रित नहीं हो पा रही है। उन्होंने प्रशासन से क्षेत्र में विशेषज्ञों की टीम भेजने की मांग की। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डाॅ. प्रलयंकरनाथ ने बताया कि जिले में 79 हजार पशुओं का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। अभी तक 1178 मवेशियों में बीमारी की सूचना है और 916 पशु ठीक हो चुके हैं जबकि 23 की मौत की सूचना है। 58 टीमें जिले में गांव-गांव जाकर टीकाकरण कर रही हैं। टीकाकरण के बावजूद बीमारी के लक्षण आ सकते हैं लेकिन मौत की आशंका कम हो जाएगी। पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है कि जिन मवेशियों में लक्षण नहीं हैं उनको संक्रमित पशुओं के संपर्क में न आने दिया जाए।
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