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Chamoli News: एक फीट तक चौड़ी हुई खेतों में पड़ी दरारें
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अपनी जमा पूंजी लगाकर लोगों ने नए घर बनाए। भविष्य अच्छे से बिताने का सपना देखा था लेकिन अचानक नगर में शुरू हुए भू-धंसाव से सारे सपने जैसे दरारों में समा गए। लाखों रुपये खर्च करके बनाए मकान अब रहने लायक नहीं बचे। किसी प्रभावित का 25 लाख तो किसी को 50 लाख का नुकसान हो रहा है। जहां स्थिति ज्यादा खराब है वहां लोगों ने घर छोड़ दिए हैं। वहीं कई लोग दरारों से मकानों को हुए नुकसान की मरम्मत करने में भी लगे हुए हैं।
जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव ने लोगों से न सिर्फ छत छीन ली है बल्कि उनकी जीवन भर की कमाई से बनाए मकान टूट रहे हैं। सुनील गांव में प्रमोद सकलानी ने हाल ही में 25 लाख रुपये लगाकर मकान बनाया लेकिन दरारें आने से मकान रहने लायक नहीं है। मकान के एक कमरे को लकड़ियों की बल्लियों के सहारे सुरक्षित कर परिवार के पांच सदस्य रह रहे हैं। रविग्राम के सरजीत भुजवाण ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया घर बनाया।
वह इसमें गए भी नहीं और उसमें बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं जिससे अब वह पुराने घर में ही रह रहे हैं। वहीं मनोहर बाग वार्ड निवासी चंद्र बल्लभ पांडे का कहना है कि उन्होंने 19 लाख रुपये खर्च करके मकान बनाया लेकिन अब वह रहने लायक नहीं रहा है। सब बरबाद हो गया है। इसी वार्ड के संतोष बिष्ट का कहना है कि उन्होंने 50 लाख रुपये खर्च करके मकान बनाया। लेकिन दरार आने से नीचे के कमरे जर्जर हो चुके हैं।
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धीरे-धीरे दरारें बढ़ती जा रही हैं। वहीं सिंधार वार्ड के गणेश सती ने बताया कि उन्होंने 35 लाख खर्च करके मकान बनाया लेकिन अब यह रहने लायक नहीं रहे। हालांकि अभी परिवार वहीं रह रहा है। स्थिति और बिगड़ती है तो उनको नया ठिकाना तलाशना पड़ेगा।
एक फीट तक चौड़ी हुई खेतों में पड़ीं दरारें
नगर क्षेत्र में भू-धंसाव से मकानों के साथ कृषि भूमि भी प्रभावित हो रही है। यहां खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हैं और यह बढ़ती जा रही हैं। कई जगहों पर तो खेतों की दरारें एक फीट तक चौड़ी हो गई हैं। जोशीमठ नगर एक साल से भू-धंसाव की चपेट में है लेकिन पिछले कुछ समय से भू-धंसाव काफी तेज हो रहा है। इससे सैकड़ों मकानों में दरारें आ गई हैं। इनकी संख्या भी हर दिन बढ़ती जा रही है।
वहीं लोगों की कृषि भूमि भी भू-धंसाव से अछूती नहीं है। मनोहर बाग वार्ड के भगवती प्रसाद कपरवाण, दुर्गा प्रसाद कपरवाण, मदन प्रसाद कपरवाण, विजय सती, संजय सती आदि का कहना है कि इन दिनों लोगों ने खेतों में सब्जियां बोई हुई हैं लेकिन खेतों में भी दरारें आ रही हैं जिससे लोगों में भय बना है।
दो दिन में 36 मकानों का हुआ सर्वे
जिला प्रशासन की ओर से गठित संयुक्त टीम की ओर से नगर में भू-धंसाव से प्रभावित मकानों के सर्वे का काम दूसरे दिन भी जारी रहा। तहसील प्रशासन, नगर पालिका, आपदा प्रबंधन और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम घर-घर जाकर बारीकी से निरीक्षण कर रही है। दूसरे दिन भी वार्ड नंबर एक गांधी वार्ड में मकानों का निरीक्षण किया गया। दूसरे दिन तक 36 मकानों का सर्वे किया जा चुका है।
सर्वे के दौरान मकान की स्थिति, कमरों की संख्या और उनकी स्थिति, मकान में रहने वाले परिवार और सदस्यों की संख्या सहित अन्य जानकारियां दर्ज की जा रही हैं। जोशीमठ नगर में करीब दो हजार मकान हैं। नगर पालिका की ओर से किए जा रहे सर्वे के अनुसार भू-धंसाव से 581 मकानों में दरारें आ चुकी हैं। ऐसे में सर्वे का काम पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।
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जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव ने लोगों से न सिर्फ छत छीन ली है बल्कि उनकी जीवन भर की कमाई से बनाए मकान टूट रहे हैं। सुनील गांव में प्रमोद सकलानी ने हाल ही में 25 लाख रुपये लगाकर मकान बनाया लेकिन दरारें आने से मकान रहने लायक नहीं है। मकान के एक कमरे को लकड़ियों की बल्लियों के सहारे सुरक्षित कर परिवार के पांच सदस्य रह रहे हैं। रविग्राम के सरजीत भुजवाण ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया घर बनाया।
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वह इसमें गए भी नहीं और उसमें बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं जिससे अब वह पुराने घर में ही रह रहे हैं। वहीं मनोहर बाग वार्ड निवासी चंद्र बल्लभ पांडे का कहना है कि उन्होंने 19 लाख रुपये खर्च करके मकान बनाया लेकिन अब वह रहने लायक नहीं रहा है। सब बरबाद हो गया है। इसी वार्ड के संतोष बिष्ट का कहना है कि उन्होंने 50 लाख रुपये खर्च करके मकान बनाया। लेकिन दरार आने से नीचे के कमरे जर्जर हो चुके हैं।
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धीरे-धीरे दरारें बढ़ती जा रही हैं। वहीं सिंधार वार्ड के गणेश सती ने बताया कि उन्होंने 35 लाख खर्च करके मकान बनाया लेकिन अब यह रहने लायक नहीं रहे। हालांकि अभी परिवार वहीं रह रहा है। स्थिति और बिगड़ती है तो उनको नया ठिकाना तलाशना पड़ेगा।
एक फीट तक चौड़ी हुई खेतों में पड़ीं दरारें
नगर क्षेत्र में भू-धंसाव से मकानों के साथ कृषि भूमि भी प्रभावित हो रही है। यहां खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हैं और यह बढ़ती जा रही हैं। कई जगहों पर तो खेतों की दरारें एक फीट तक चौड़ी हो गई हैं। जोशीमठ नगर एक साल से भू-धंसाव की चपेट में है लेकिन पिछले कुछ समय से भू-धंसाव काफी तेज हो रहा है। इससे सैकड़ों मकानों में दरारें आ गई हैं। इनकी संख्या भी हर दिन बढ़ती जा रही है।
वहीं लोगों की कृषि भूमि भी भू-धंसाव से अछूती नहीं है। मनोहर बाग वार्ड के भगवती प्रसाद कपरवाण, दुर्गा प्रसाद कपरवाण, मदन प्रसाद कपरवाण, विजय सती, संजय सती आदि का कहना है कि इन दिनों लोगों ने खेतों में सब्जियां बोई हुई हैं लेकिन खेतों में भी दरारें आ रही हैं जिससे लोगों में भय बना है।
दो दिन में 36 मकानों का हुआ सर्वे
जिला प्रशासन की ओर से गठित संयुक्त टीम की ओर से नगर में भू-धंसाव से प्रभावित मकानों के सर्वे का काम दूसरे दिन भी जारी रहा। तहसील प्रशासन, नगर पालिका, आपदा प्रबंधन और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम घर-घर जाकर बारीकी से निरीक्षण कर रही है। दूसरे दिन भी वार्ड नंबर एक गांधी वार्ड में मकानों का निरीक्षण किया गया। दूसरे दिन तक 36 मकानों का सर्वे किया जा चुका है।
सर्वे के दौरान मकान की स्थिति, कमरों की संख्या और उनकी स्थिति, मकान में रहने वाले परिवार और सदस्यों की संख्या सहित अन्य जानकारियां दर्ज की जा रही हैं। जोशीमठ नगर में करीब दो हजार मकान हैं। नगर पालिका की ओर से किए जा रहे सर्वे के अनुसार भू-धंसाव से 581 मकानों में दरारें आ चुकी हैं। ऐसे में सर्वे का काम पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।