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45 साल पहले चेत जाते तो सुरक्षित रहता जोशीमठ

Sun, 28 Aug 2022 09:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 28 Aug 2022 09:24 PM IST
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Joshimath would have been safe if he had been warned 45 years ago
जोशीमठ क्षेत्र में हो रहा भू-धंसाव कोई नया नहीं है, बल्कि दशकों पहले से यहां भू-धंसाव की समस्या रही है। 45 वर्ष पहले क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव को लेकर मिश्रा कमेटी ने यहां का भू-सर्वेक्षण किया था जिसमें उन्होंने जोशीमठ नगर को सुरक्षित रखने के लिए कई सुझाव दिए थे। यदि पूर्ववर्ती सरकारों ने उस रिपोर्ट पर अमल किया होता तो आज जोशीमठ में रह रहे लोग खतरे के साये में जीने के लिए विवश न होते। हाल ही में शासन की ओर से गठित भू-वैज्ञानिकों की टीम ने नगर को लेकर वही आशंकाएं जाहिर की हैं जो 45 वर्ष पहले हुए सर्वे में की गई थी।
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जोशीमठ क्षेत्र में भू-धंसाव इन दिनों बड़ी समस्या बना है। यहां अलकनंदा किनारे से लेकर सुनील वार्ड, गांधीनगर, रविग्राम और नृसिंह मंदिर परिसर में भू-धंसाव हो रहा है। यहां तक कि इसी क्षेत्र से लगे तपोवन, रैणी व अन्य गांवों में भी आवासीय भवन भू-धंसाव की चपेट में हैं जबकि कई मकानों में दरारें आ चुकी हैं। इसकी गंभीरता को देखते हुए शासन ने भू-वैज्ञानिकों की टीम से यहां का भू-सर्वेक्षण कराया है। हालांकि जोशीमठ में भू-धंसाव को लेकर वर्ष 1976 में उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वे कराया था। तत्कालीन गढ़वाल आयुक्त महेश चंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में वैज्ञानिकों की कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने क्षेत्र को लेकर कई जानकारी और सुझाव दिए थे। हाल ही में शासन की ओर से गठित भू-वैज्ञानिकों की टीम ने भी नगर को लेकर वही आशंकाएं जाहिर की हैं जो 45 वर्ष पहले हुए सर्वे में की गई थीं। संवाद
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मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट में दिए सुझाव
वर्ष 1976 में गठित मिश्रा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जोशीमठ क्षेत्र मोरेन (ग्लेशियर की ओर से लाई गई मिट्टी) पर बसा है। इसलिए यह खिसकता रहता है। नगर को बचाए रखने के लिए यहां बड़े-बड़े बोल्डर और चट्टानों से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। भारी निर्माण से शहर को खतरा हो सकता है। पानी की निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। अलकनंदा नदी से लगातार कटाव हो रहा है जिसे रोकने के लिए नदी पर तटबंध बनाए जाएं। जहां ढलान हैं वहां भूस्खलन हो रहा है उस क्षेत्र में सघन पौधरोपण किया जाना चाहिए।
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सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। क्षेत्र में पक्के निर्माणों के साथ ही बड़ी परियोजनाओं पर रोक लगानी चाहिए। यह क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। हमने शासन से मांग की है कि भू-धंसाव से प्रभावित घर जो रहने लायक नहीं हैं उनको चिह्नित कर गिराया जाए और लोगों के रहने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। - अतुल सती, संयोजक, जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति, जोशीमठ, चमोली।

जोशीमठ क्षेत्र में जगह-जगह भू सर्वेक्षण कार्य किया गया है। टीम जल्द अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर क्षेत्र में सुरक्षात्मक कार्य कराए जाएंगे। -
हिमांशु खुराना, डीएम, चमोली।
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