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Chamoli: प्राकृतिक संपदा भोजपत्र व सांस्कृतिक विरासत पौणा नृत्य पर आधारित लिफाफे जारी, जानें क्यों हैं ये खास

Thu, 24 Aug 2023 02:38 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर (चमोली)
संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर (चमोली) Updated Thu, 24 Aug 2023 02:38 PM IST
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Chamoli: Envelopes based on natural wealth Bhojpatra and cultural heritage Pauna dance released
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

डाक विभाग की ओर से हिमालय की प्राकृतिक संपदा भोजपत्र और सांस्कृतिक विरासत पौणा नृत्य पर खास लिफाफे जारी किए हैं। मंगलवार को आंबेडकर भवन में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी हिमांशु खुराना, मुख्यमंत्री के सलाहकार बीडी सिंह व डाक अधीक्षक एचसी उपाध्याय ने इन लिफाफों को लांच किया। इस दौरान भोटिया जनजाति की महिलाओं ने पौणा नृत्य की प्रस्तुति भी दी।

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डाक विभाग की ओर से तैयार किए गए विशेष लिफाफे में टिकट की जगह भोजपत्र का चित्र लगाया गया है जबकि दूसरे में पौणा नृत्य का चित्र दर्शाया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि पौणा नृत्य और भोजपत्र हमारी प्राचीन विरासत हैं। इनका संरक्षण जरूरी है। भोजपत्र को लोगों की आर्थिकी से जोड़ते हुए इसके संरक्षण के लिए काम किया जा रहा है।
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नीती-माणा घाटी की महिलाओं की ओर से भोजपत्र पर बदरीनाथ की आरती के साथ ही कई कलाकृतियां बनाई जा रही हैं जिन्हें यात्रियों को बेचकर महिलाएं अच्छी आमदनी प्राप्त कर रही हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में भोजपत्र की नर्सरी भी तैयार की जा रही है। इस अवसर पर कार्यालय सहायक दिनेश चंद्र सेमवाल सहित अन्य कर्मचारी व स्थानीय लोग मौजूद थे।

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क्या है भोजपत्र
- कागज की खोज से पहले देश में लिखाई का काम भोजपत्र पर ही किया जाता था। भोजपत्र पर लिखा हुआ सैकड़ों वर्षों तक संरक्षित रहता है। देश में आज भी भोजपत्र पर लिखी कई पांडुलिपियां सुरक्षित रखी गई हैं। भोजपत्र का वानस्पतिक नाम बेतुला यूटीलिस है। यह हिमालय क्षेत्र में 4500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। इसकी छाल सफेद रंग की होती है।

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पौणा नृत्य
पौंणा नृत्य चमोली जनपद के सीमा क्षेत्र के भोटिया जनजाति के ग्रामीणों की सांस्कृतिक विरासत है। यह नृत्य एक पारंपरिक लोकनृत्य है और सभी उत्सवों व शुभ अवसरों पर किया जाता है। आतिथ्य सत्कार से लेकर विवाह समारोह में पौंणा नृत्य आकर्षण का केंद्र रहता है। महिलाओं और पुरुषों की ओर से ढोल दमाऊं की थाप पर पौंणा नृत्य किया जाता है। पौंणा शब्द बरात के लिए प्रयुक्त होता है। इसमें ग्रामीण एक लयबद्ध तरीके से नृत्य करते हैं।

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