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Chamoli News: दो दिनों से जल रहे जंगल, कई हेक्टेयर वन संपदा नष्ट

Thu, 08 Jan 2026 06:58 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली Updated Thu, 08 Jan 2026 06:58 PM IST
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Forests have been burning for two days, destroying several hectares of forest wealth
गोपेश्वर के समीप मंडल घाटी के जंगल में लगी आग को बुझाते वन कर्मी। स्रोत: वन विभाग
फोटो
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केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के मंडल घाटी में लगी आग, चट्टानी भाग होने के कारण नहीं हो पा रही काबू

बालखिला नदी के किनारे से लगी आग चट्टान तक पहुंची, घाटी में फैला धुंआ

संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। चमोली जनपद में बारिश, बर्फबारी न होने से अब सुदूरवर्ती पहाड़ियों पर भी आग लगने लगी है। पिछले दो दिनों से केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के मंडल घाटी में आरक्षित वन क्षेत्र में आग से कई हेक्टेयर वन संपदा नष्ट हो चुकी है। वन कर्मियों की टीम क्षेत्र में ही मुस्तैद है लेकिन आग चट्टानी भाग पर लगी होने के कारण काबू में नहीं आ पा रही है। बृहस्पतिवार को भी दिनभर जंगल में आग लगी रही। आग लगने से घाटी में चारों ओर धुआं फैल गया है।

मंडल घाटी के अंतिम गांव सिरौली के समीप बालखिला नदी के किनारे से लगी पहाड़ी पर सूखी घास पर आग भड़क गई। देखते ही देखते आग विकराल हो गई। पहाड़ी पर आग किसने लगाई इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। पहाड़ी पर आग लगने की सूचना मिलते ही मौके पर वन कर्मियों की टीम पहुंची मगर आग को बुझाया नहीं जा सका। पहाड़ी पर सूखी घास होने के कारण आग विकराल हो गई है। वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश पंवार का कहना है कि वन कर्मियों की टीम आग बुझाने का प्रयास कर रही है। निचले क्षेत्रों में लगी आग बुझा दी गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आग चट्टानी भाग तक फैल गई है। उन्होंने कहा कि बारिश, बर्फबारी न होने के कारण जमीन में नमी नहीं है जिससे आग तेजी से भड़क रही है। जल्द आग को काबू कर लिया जाएगा।
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बर्फ से ढकी चोटियां पड़ने लगीं कालीं

भालू के बाद अब वनाग्नि की घटनाओं ने उड़ाई वन विभाग के अधिकारियों की नींद

प्रमोद सेमवाल

गोपेश्वर। चमोली जनपद में जनवरी माह में जो चोटियां बर्फ से लकदक रहती थीं वे अब बर्फविहीन हैं। बर्फ के बिना चोटियां काली पड़ने लगी हैं। स्थिति यह है कि मौसम की बेरुखी के कारण अब सुदूरवर्ती पहाड़ियों पर घास सूख गई है और वनाग्नि की घटनाएं होने लगी हैं।
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प्रतिवर्ष दिसंबर माह से बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो जाता है। बारिश होने से भूमि में नमी बनी रहती है। मगर अब बीते वर्ष सितंबर माह से बारिश नहीं हुई है। बर्फबारी भी आशा के अनुरूप नहीं हुई है जिससे चोटियां सूनी पड़ी हैं। सर्दियों में वनाग्नि की घटनाएं बहुत कम होती हैं। मगर इस वर्ष जनवरी माह में ही जंगल जल रहे हैं। वनाग्नि की घटनाओं ने वन विभाग के अधिकारियों की नींद भी उड़ा दी है। इस वर्ष गांव-गांव में भालू की दहशत रही जिससे वन विभाग के अधिकारियों से लेकर कर्मी रात-दिन लंबी दूरी की गश्त पर रहे। अब वनाग्नि की घटनाएं सामने आने लगी हैं। केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दुबे का कहना है कि अब बारिश और बर्फबारी न होने से वनाग्नि की घटनाएं सामने आने लगी हैं। जंगलों में आग लगाने वालों को चिह्नित किया जाएगा। अधिकारियों को क्षेत्रों में बने रहने और वनों में आग लगाने वालों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
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