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बारिश न होने से फूलों की घाटी में कम खिल रहे फूल
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लंबे समय से बारिश न होने का असर विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी पर भी नजर आ रहा है। सामान्य स्थिति में यहां जून के प्रथम सप्ताह में फूल खिल जाते थे। इस वर्ष अभी तक घाटी में बेहद कम फूल नजर आ रहे हैं।
एक जून को फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खोल दी गई थी। अभी तक 700 पर्यटक घाटी पहुंच चुके हैं। हालांकि बारिश नहीं होने से घाटी में अभी करीब एक दर्जन प्रजाति के फूल ही खिले हैं। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन को बारिश होने और फूलों के खिलने का इंतजार है। बारिश होते ही यहां कई तरह के फूल खिलने शुरू हो जाते हैं।
घाटी से लौटे अल्मोड़ा के गोकुल कुमार गोस्वामी, महाराष्ट्र के राज शाह, बंगाल के करण सलूजा का कहना है कि घाटी में कम प्रजाति के फूल खिले हैं, लेकिन प्राकृतिक सुंदरता अद्भुत है।
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दरअसल फूलों की घाटी में जुलाई और अगस्त में सबसे अधिक फूल खिलते हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के शुरू में यहां 300 से अधिक प्रजातियों के फूल देखने को मिलते हैं। उस दौरान पूरी घाटी रंब बिरंगे फूलों से महकने लगती है। फूलों की घाटी के वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन भारती का कहना है कि बरसात नहीं होने से कम फूल खिले हैं। बारिश होते ही घाटी फूलों से सराबोर हो जाएगी।
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एक जून को फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खोल दी गई थी। अभी तक 700 पर्यटक घाटी पहुंच चुके हैं। हालांकि बारिश नहीं होने से घाटी में अभी करीब एक दर्जन प्रजाति के फूल ही खिले हैं। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन को बारिश होने और फूलों के खिलने का इंतजार है। बारिश होते ही यहां कई तरह के फूल खिलने शुरू हो जाते हैं।
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घाटी से लौटे अल्मोड़ा के गोकुल कुमार गोस्वामी, महाराष्ट्र के राज शाह, बंगाल के करण सलूजा का कहना है कि घाटी में कम प्रजाति के फूल खिले हैं, लेकिन प्राकृतिक सुंदरता अद्भुत है।
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दरअसल फूलों की घाटी में जुलाई और अगस्त में सबसे अधिक फूल खिलते हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के शुरू में यहां 300 से अधिक प्रजातियों के फूल देखने को मिलते हैं। उस दौरान पूरी घाटी रंब बिरंगे फूलों से महकने लगती है। फूलों की घाटी के वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन भारती का कहना है कि बरसात नहीं होने से कम फूल खिले हैं। बारिश होते ही घाटी फूलों से सराबोर हो जाएगी।