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आखिरकार चिपको आंदोलन की सूत्रधार गौरा देवी के बेटे को मिला हक

Wed, 29 Jun 2022 09:00 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jun 2022 09:00 PM IST
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Finally the son of Gaura Devi, the architect of the Chipko movement, got the right
आखिरकार सरकार ने चिपको आंदोलन की सूत्रधार गौरा देवी के इकलौते वारिस उनके बुजुर्ग बेटे चंद्र सिंह (70) को उत्तराखंड रत्न की सम्मान निधि पांच लाख रुपये की धनराशि सौंप दी है। बुधवार को जोशीमठ तहसील में एक सादे समारोह में एसडीएम कुमकुम जोशी ने चंद्र सिंह को पांच लाख एक रुपये का चेक भेंट किया।
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वर्ष 2016 में चिपको आंदोलन की सूत्रधार रही रैणी गांव की गौरा देवी को उत्तराखंड रत्न सम्मान के लिए चुना गया था। तब उनके बेटे चंद्र सिंह को देहरादून बुलाकर प्रशस्तिपत्र तो दिया गया, लेकिन वारिस प्रमाणपत्र व अन्य दस्तावेज जमा करने के बाद ही सम्मान राशि पांच लाख रुपये देने का आश्वासन दिया गया था। आवश्यक पत्रावलियां जमा करने के बावजूद उन्हें सम्मान राशि नहीं मिली। इसी वर्ष 26 मार्च को चिपको आंदोलन की 48वीं वर्षगांठ पर इस बात का खुलासा हुआ। 6 अप्रैल को अमर उजाला ने ‘गौरा देवी के बुजुर्ग बेटे को सम्मान निधि के लिए दौड़ा रहा सिस्टम’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। मुख्यमंत्री ने खबर का संज्ञान लिया और गौरा देवी के बेटे को देहरादून बुलाकर ससम्मान निधि की राशि देने के निर्देश देहरादून जिला प्रशासन को दिए थे। प्रशासन ने चंद्र सिंह को देहरादून तो बुलाया, लेकिन सम्मान राशि नहीं दी। उन्हें सम्मान राशि डाक से भेजने की बात कही गई, लेकिन दो माह बाद भी सम्मान राशि न मिलने पर 31 मई को ‘सुस्त सिस्टम को सीएम भी नहीं कर पाए चुस्त’ शीर्षक से दोबारा खबर प्रकाशित हुई, जिसके बाद फिर से शासन में सम्मान राशि को लेकर फाइलें दौड़ने लगी। आखिरकार बुधवार को जोशीमठ में एसडीएम कुमकुम जोशी के हाथों गौरा देवी के बेटे चंद्र सिंह को पांच लाख एक रुपये का चेक सौंपा गया। इस अवसर पर कागा गरपक के ग्राम प्रधान पुष्कर सिंह राणा, स्वर्गीय गौरा देवी के पौत्र सोहन सिंह राणा और असिस्टेंट प्रोफेसर नंदन सिंह राणा आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला का जताया आभार
गौरा देवी के बुजुर्ग बेटे चंद्र सिंह ने कहा कि अमर उजाला समाचार पत्र ने अपने कर्तव्य का निर्वहन कर उन्हें हक दिला दिया। कहा कि उन्होंने अब सम्मान राशि मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी थी, लेकिन अमर उजाला ने लगातार खबरों के माध्यम से सरकार को चेताने का काम किया, जिसके फलस्वरूप यह सम्मान राशि मिल पाई है। कागा गरपक के ग्राम प्रधान पुष्कर सिंह राणा ने कहा कि अमर उजाला समाचारपत्र पहले से ही जनमुद्दों के लिए जूझता है। आज फिर से समाचारपत्र की खबरों ने यह सच कर दिखाया है। संवाद
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