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जानवरों के डर से खेती छोड़ने को मजबूर
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली (गोपेश्वर)
Updated Sun, 09 Oct 2016 09:10 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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गांवों में किसानों की खेती बर्बाद हो रही है। यदि जल्द सूअर और बंदरों के आतंक से निजात नहीं दिलाई गई तो गांवों में बचे किसान भी खेती छोड़ देंगे।
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कालेश्वर में आयोजित कृषक महोत्सव के दौरान किसानों ने अधिकारियों से अपनी समस्याएं बताईं। अफसरों ने बंदरों और सूअरों को मारने और पकड़ने के तरीके बताए लेकिन किसानों ने वन और कृषि विभाग से संयुक्त रूप से अभियान चलाकर किसानों को जंगली जानवरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग की।
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प्राथमिक विद्यालय में आयोजित कृषक महोत्सव में क्षेत्र के नोडल अधिकारी और जिले के मुुख्य विकास अधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि किसानों को कृषि, पशुपालन, चारा विकास सहित अन्य क्षेत्रों में संचालित सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए।
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उन्होंने सफाई व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया। रथ प्रभारी डा. चित्रा धीमान, समाज कल्याण के सहायक अधिकारी एमएस भंडारी, सहायक कृषि अधिकारी प्रेम प्रकाश शैली सहित उद्यान निरीक्षक पूजा डिमरी आदि ने विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।
प्रधान हरीश चौहान ने कृषि भूमि के चारे ओर सुरक्षा प्रबंध करने की मांग की। इस अवसर पर किसानों को गेहूं सहित अन्य फसलों के बीच और कृषि उपकरण अनुदान पर उपलब्ध कराए गए। महोत्सव में क्षेत्र पंचायत सदस्य महेंद्र कुमार, कालेश्वर की महिला मंगल दल अध्यक्ष रेखा देवी, स्वर्का की प्रेमा मैखुरी, जयकंडी के प्रधान संदीप खंडूड़ी, मैखुरा के राकेश लाल, उमट्टा के गिरीश डिमरी, ताजवर नेगी, बीडीओ एनएस चौहान, एडीओ पंचायत एमएम नगवाल, वीपीडीओ कविता राणा, अवर अभियंता उदय कुमार आदि मौजूद थे।