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फसल उत्पादन में आने वाली हर बाधा होगी दूर
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किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के लिए जिला प्रशासन ने माइक्रोप्लान तैयार किया है। इसके तहत किसानों को फसल उत्पादन में आने वाली बाधाओं को दूर करके उत्पादन को बढ़ाने की व्यवस्थाएं की जाएंगी। साथ ही नशा रहित भांग की खेती की जाएगी। डीएम स्वाति एस भदौरिया की अध्यक्षता में विकास भवन में विभिन्न ब्लाकों से पहुंचे उन्नतशील कृषकों को माइक्रोप्लान की जानकारी दी गई और कृषकों के सुझाव भी लिए गए।
डीएम स्वाति एस भदौरिया ने कहा कि माइक्रोप्लान के तहत जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए वन विभाग व मनरेगा के माध्यम से कार्ययोजना बनाई जा रही है। वन विभाग व कृषि विभाग की ओर से बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने की कार्रवाई चल रही है। प्रशासन की ओर से भी जानवरों को भगाने के लिए स्पेशल डिवाइस लगाकर कृषकों को हरसंभव मदद दी जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी हंसादत्त पांडे ने कहा कि हैंप एसोसिएशन ऑफ इंडिया के माध्यम से नशा रहित भांग के बीज तैयार किए गए हैं। इस भांग के रेशे से कपड़े तैयार किए जा रहे हैं वहीं, इसकी पत्तियों से कई बेशकीमती दवाइयां बनाई जा रही हैं, जो किसान खेती नहीं कर रहे हैं उनके खेतों को लीज पर लेकर भांग की खेती की शुरुआत हो चुकी है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक डा. एमएस सजवाण ने कहा कि पशुपालन, मशरूम की खेती, मधुमक्खी पालन आदि उत्पादन जैसी छोटी-छोटी इकाइयों को स्थापित करने के लिए सब्सिडी सहित ऋण उपलब्ध किया जा रहा है। काश्तकार अपनी परंपरागत खेती के साथ-साथ अच्छी आय अर्जित कर दोहरा लाभ कमा सकते हैं। इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी रामकुमार दोहरे, अपर जिला कृषि अधिकारी जितेंद्र भास्कर, उद्यान, मत्स्य, दुग्ध पालन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
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डीएम स्वाति एस भदौरिया ने कहा कि माइक्रोप्लान के तहत जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए वन विभाग व मनरेगा के माध्यम से कार्ययोजना बनाई जा रही है। वन विभाग व कृषि विभाग की ओर से बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने की कार्रवाई चल रही है। प्रशासन की ओर से भी जानवरों को भगाने के लिए स्पेशल डिवाइस लगाकर कृषकों को हरसंभव मदद दी जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी हंसादत्त पांडे ने कहा कि हैंप एसोसिएशन ऑफ इंडिया के माध्यम से नशा रहित भांग के बीज तैयार किए गए हैं। इस भांग के रेशे से कपड़े तैयार किए जा रहे हैं वहीं, इसकी पत्तियों से कई बेशकीमती दवाइयां बनाई जा रही हैं, जो किसान खेती नहीं कर रहे हैं उनके खेतों को लीज पर लेकर भांग की खेती की शुरुआत हो चुकी है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक डा. एमएस सजवाण ने कहा कि पशुपालन, मशरूम की खेती, मधुमक्खी पालन आदि उत्पादन जैसी छोटी-छोटी इकाइयों को स्थापित करने के लिए सब्सिडी सहित ऋण उपलब्ध किया जा रहा है। काश्तकार अपनी परंपरागत खेती के साथ-साथ अच्छी आय अर्जित कर दोहरा लाभ कमा सकते हैं। इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी रामकुमार दोहरे, अपर जिला कृषि अधिकारी जितेंद्र भास्कर, उद्यान, मत्स्य, दुग्ध पालन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
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