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नारायणबगड़, ग्वालदम में पेयजल लाइनें, प्राकृतिक स्रोत जमे
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शुक्रवार को मौसम साफ होने के बाद भी लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। कर्णप्रयाग सहित गैरसैंण, आदिबदरी, थराली, देवाल व नारायणबगड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में पैदल रास्तों और आंगन में बर्फ जमी है। ऐसे में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आदिबदरी के प्यूंरा, पज्याणां, लंगटाईं, सिलपाटा, मालसी कर्णप्रयाग के बेनीताल, नंदासैंण, नौटी, पुडियाणी, चौरासैंण गांव, देवाल के वांण, घेस, सवाड़, नारायणबगड़ केे मनोड़ा, छेकुड़ा, डुंग्री, रेंस, चोपता गांव व थराली के ग्वालदम कस्बे समेत कई गांवों में पेयजल लाइनें और प्राकृतिक स्रोत जम गए हैं। नरेश सिंह, मान सिंह, महिपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, मेहरबान सिंह और उमेश सिंह आदि ने कहा कि इन सभी गांवों के मकानों, आंगन व खेतों में चारों तरफ बर्फ जमने से लोग घरों के बाहर नहीं आ पा रहे हैं। पेयजल लाइन और प्राकृतिक स्रोतों पर पानी जम गया है। ग्रामीण अपने पालतू पशुओं को चारा लाने के लिए जंगल नहीं जा पा रहे हैं। साथ ही जंगली भालू और सूअर ठंड से बचने के लिए आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। संवाद
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आदिबदरी के प्यूंरा, पज्याणां, लंगटाईं, सिलपाटा, मालसी कर्णप्रयाग के बेनीताल, नंदासैंण, नौटी, पुडियाणी, चौरासैंण गांव, देवाल के वांण, घेस, सवाड़, नारायणबगड़ केे मनोड़ा, छेकुड़ा, डुंग्री, रेंस, चोपता गांव व थराली के ग्वालदम कस्बे समेत कई गांवों में पेयजल लाइनें और प्राकृतिक स्रोत जम गए हैं। नरेश सिंह, मान सिंह, महिपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, मेहरबान सिंह और उमेश सिंह आदि ने कहा कि इन सभी गांवों के मकानों, आंगन व खेतों में चारों तरफ बर्फ जमने से लोग घरों के बाहर नहीं आ पा रहे हैं। पेयजल लाइन और प्राकृतिक स्रोतों पर पानी जम गया है। ग्रामीण अपने पालतू पशुओं को चारा लाने के लिए जंगल नहीं जा पा रहे हैं। साथ ही जंगली भालू और सूअर ठंड से बचने के लिए आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। संवाद
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