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Chamoli News: तिमूर की खेती को रोजगार से जोड़ने की मांग
Tue, 22 Oct 2024 06:17 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Tue, 22 Oct 2024 06:17 PM IST
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देवाल। ब्लॉक के गांवों में तिमूर की खेती किए जाने की मांग हो रही है। स्थानीय लोगों ने सीएम को ज्ञापन भेजकर तिमूर की खेती को रोजगार से जोड़ने की मांग की।
ब्लाॅक के घेस, हिमनी, बलाण, पिनाऊं में ग्रामीण अतीश, जटामासी, कुटकी आदि जड़ी-बूटी की खेती करते हैं। यहां के हिमालयी गांव में कई तरह की जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं जिनमें औषधीय गुणों वाला तिमूर भी है। लगभग 15 फीट की ऊंचाई वाले इस पौधे की जड़ से लेकर तना, छाल, पत्ती, बीज कई बीमारियों के इलाज में काम आता है। घेस के काश्तकार केशर सिंह बिष्ट का कहना कि तिमूर यहां के जंगलों में काफी मात्रा में हैं। सदाबहार पौध होने के कारण इसकी खेती से बेरोजगारों को वर्षभर रोजगार मिल सकता है। वहीं जड़ी बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर के वैज्ञानिक डॉ. सीपी कुनियाल ने बताया कि तिमूर पेट, दांत दर्द, पायरिया, ल्पोकोडर्मा, खांसी, बुखार आदि बीमारी के रोकथाम में काम आता है। पूर्णां गांव के भैरव दत्त मिश्रा, घेस के कुंदन भंडारी, बलाण के गोविंद सिंह आदि ने तिमूर की खेती को रोजगार से जोड़ने की मांग की। संवाद
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ब्लाॅक के घेस, हिमनी, बलाण, पिनाऊं में ग्रामीण अतीश, जटामासी, कुटकी आदि जड़ी-बूटी की खेती करते हैं। यहां के हिमालयी गांव में कई तरह की जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं जिनमें औषधीय गुणों वाला तिमूर भी है। लगभग 15 फीट की ऊंचाई वाले इस पौधे की जड़ से लेकर तना, छाल, पत्ती, बीज कई बीमारियों के इलाज में काम आता है। घेस के काश्तकार केशर सिंह बिष्ट का कहना कि तिमूर यहां के जंगलों में काफी मात्रा में हैं। सदाबहार पौध होने के कारण इसकी खेती से बेरोजगारों को वर्षभर रोजगार मिल सकता है। वहीं जड़ी बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर के वैज्ञानिक डॉ. सीपी कुनियाल ने बताया कि तिमूर पेट, दांत दर्द, पायरिया, ल्पोकोडर्मा, खांसी, बुखार आदि बीमारी के रोकथाम में काम आता है। पूर्णां गांव के भैरव दत्त मिश्रा, घेस के कुंदन भंडारी, बलाण के गोविंद सिंह आदि ने तिमूर की खेती को रोजगार से जोड़ने की मांग की। संवाद
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